संयम लोढ़ा धमकियों और टकराव की राजनीति छोड़कर रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभायें – चौहान

सिरोही(हरीश दवे) ।

जिले के आमलारी गांव में हुए अभय कुमार राजपुरोहित हत्या कांड के मामाले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है,बल्कि राजनीतिक अवसरवाद, अहंकार और दुर्भाग्यपूर्ण मानसिकता का परिचायक भी है। एक संवेदनशील हत्या की घटना पर शोक और संवेदना व्यक्त करने के बजाय उसमें राजनीतिक लाभ तलाशना अत्यंत निंदनीय है।
भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य वीरेन्द्रसिंह चौहान ने लोढ़ा के बयान की कड़े शब्दो में निंदा करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषय पर राज्य सरकार को धमकियां देना और यह कहना कि मंत्रियों का सिरोही जिले में प्रवेश मुश्किल कर दिया जाएगा, लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और राजनीतिक शिष्टाचार के बिल्कुल विपरीत है। इस प्रकार की भाषा किसी पुर्व जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देती।
चौहान ने कहा कि संयम लोढ़ा को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजस्थान संविधान और कानून के शासन से चलता है, किसी व्यक्ति विशेष के अहंकार, दबाव या धमकियों से नहीं। सिरोही की जनता उनके विधायक कार्यकाल को भी देख चुकी है और उनके अहंकारपूर्ण रवैये, द्वेष की राजनीति तथा टकराव की शैली से भली-भांति परिचित है। उन्होने कहा कि अभय पुरोहित की हत्या अत्यंत दुखद और संवेदनशील घटना है। इस मामले में दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करना राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सरकार निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चौहान ने कहा कि पंचायती राज्यमंत्री एवं सिरोही विधायक ओटाराम देवासी ने पीढ़ीत परिवार से मुलाकात कर सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता एवं परिवार के सदस्य को सरकारी रोजगार उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया उसके बाद भी ऐसे समय में भड़काऊ और उकसाऊ बयान देकर सामाजिक तनाव बढ़ाने का प्रयास करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना है।
उन्होने कहा कि यदि संयम लोढ़ा वास्तव में जनता के हितैषी हैं, तो उन्हें धमकियों और टकराव की राजनीति छोड़कर रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। प्रदेश और सिरोही की जनता विकास, शांति, सुशासन और न्याय चाहती है, न कि भय, भ्रम और राजनीतिक उन्माद फैलाने वाली बयानबाजी।

संपादक भावेश आर्य



