मीरपुर नगरी में निकला दीक्षा कल्याण का भव्य वरघोडा

नुतन जिनालय की भव्य प्रतिष्ठा होगी आज
सिरोही(हरीश दवे)।

राजस्थान के सबसे प्राचीन तीर्थ मीरपुर नगरी में भगवान मुनिसुव्रतस्वामी के बने नुतन जिनालय की प्रतिष्ठा के पूर्व भव्य वरघोडा बुधवार को आचार्य भगवंत अशोक सागरसूरीजी म. सा. आदि ठाणा की निश्रा में गाजते बाजते निकला जिसमें चुर्तविद संघ साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएं बडी तादाद में शामिल हुऐ। 9 वीं शताब्दी के प्राचीन जिनालय की इस तीर्थ भूमि पर वर्षो बाद भव्य वरघोडा निकला जिसमें हाथी, घोडे, उंट, बैण्ड बाजे बाजे व ढोल ढमाको के साथ परमात्मा को चांदी के रथ में विराजित किया गया था।
हाथी में विराजित श्रावक-श्राविकाओं ने जय जय मुनिसुव्रतस्वामी के जयकारों के साथ अनेक वस्तुओं का अर्पण उछावणी के साथ किया। दीक्षा कल्याणक का यह वरघोडा मीरपुर गांव से होता हुआ मुनिसुव्रतस्वामी जिनालय पहुंचा।ग्रामीणों ने भी वरघोड़े में शामिल भक्तों का स्वागत किया । वरघोडे में श्राविकाएं मंगलगीत गा रही थी ओर श्रावक नाचते झमुते चलते हुऐ परमात्मा की जय जयकार कर रहे थे। नागौर, जोधपुर, जयपुर ,बंगलूर व कोलकाता से बडी तादाद में भक्तगण शामिल हुऐ। बंगलूर के उधमी विजयराज चौधरी ने पूज्य साध्वी सुनन्दिताश्रीजी मसा से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया ।वरघोडे में आचार्य अशोक सागरसूरीजी, आर्चाय सौम्यचंद्र सागरसूरीजी, मुनिराज नयपध्मविजयजी, मुनिराज ललितेशविजयजी, प्रवर्तक पार्श्वचन्द्रजी, मुनिराज धर्मरत्नचन्द्रजी, मौन वरिष्ठ मुनिराज पुण्यरत्नचन्द्रजी, नंदीशचन्द्रजी, निशयचंद्रजी एवं नयशेखरविजयजी के साथ मीरपुर जहाजमंदिर की प्रेरिका एवं तीर्थ संस्थापिका सुनंदा-सुरभि सुनंदिताश्रीजी म. सा. एवं अन्य साध्वीजी शामिल थे।
जहाजमंदिर तीर्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष विजयराज चौधरी, धर्मपत्नि निर्मला देवी एवं परिवारजन के मनोज, शिल्पा, दर्शना, लवेश एवं समग्र चौधरी का भक्तों ने खुब-खुब अभिनंदन कर उन्हें पावन भूमि पर नूतन जिनालय की प्रतिष्ठा पर शुभकामनाएं दी। तीर्थ ट्रस्ट के मंत्री प्रकाश छल्लाणी ने बताया कि शाम को कुमारपाल महाराजा की भव्य आरती हुई व भक्ति संगीतकार नीलेश राणावत रात्रि में भक्ति का विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत कर भक्तों को भक्ति में लीन कर दिया ।
उन्होंने बताया कि आचार्य भगवंत की पावन निश्रा प्रात: वेला में ऊॅ पुण्याम-पुण्याण-प्रियमन्ताम-प्रियमन्ताम के मंत्रो व 10 दिशाओं में शंखनाद व घंटनाद के साथ ध्वज, दण्ड, कलश की विधिविधान के साथ स्थापना व पूजन के साथ प्रतिष्ठा होगी। प्रतिष्ठा के अवसर फलेचुंदडी होगी जिसमें 36 काॅम प्रसादी का लाभ लेगी। इस अवसर पर 108 अभिषेक भी होगा। 8 मार्च को शुभमुहूर्त में जिनालय का द्वार उदघाटन होगा और शुभ सत्तरभेदी पूजा होगी।


संपादक भावेश आर्य



