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कथा की सार्थकता तभी ,जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में धारण करें


कलश पौथी यात्रा के साथ सात दिवसीय भागवत कथा शुरू


सिरोही(हरीश दवे) ।

शहर में रामझरोखा मैदान से शनिवार को कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का शुभारंभ हुआ। बाजे गाजे के साथ निकली कलश यात्रा में श्रीमद् भागवत सप्ताह के कथावाचक आचार्य राधारमण श्रीवृदांकुंड नंन गांव वाले सहित स्थानीय महिलाएं, पुरुषों व बच्चों एवं संतो ने शामिल होकर भगवान की महिमा का गुणगान किया।
प्रातः 9 बजे श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा स्थल से निकाली गई कलश यात्रा में रामझरोखा महंत सूरदास महाराज, वैधनाथ मंदिर के संत पागल बाबा, रामपुरा से गोविंद गिरी जी महाराज, रोटा हनुमान जी महंत महेश दास जी महाराज, लोकेन्द्र गिरी जी महाराज के सानिध्य में सैकड़ो की तादाद में महिलाओ ने भाग लिया। मुख्य यजमान एडवोकेट राजेन्द्र पुरी उनकी धर्म पत्नि अरूणा पुरी ने अपने सिर पर भागवत जी की पौथी धारण की हुई थी लाल व पीले वस्त्रों में सुसज्जित महिलाए मंगल गीत गाती साथ चल रही थी। शहर के प्रमुख मार्गो से होती हुई पौथी यात्रा रामझरोखा मंदिर पहुंची जहां पूजा करने के बाद भागवतजी को व्यासपीठ पर स्थापित किया गया।
श्रीमद भागवत कथा के आयोजनकर्ता महिला मित्र मंडल एवं रामझरोखा व महामंदिर नियंत्रण सलाहकार समिति के सदस्यो ने बताया कि सात दिन तक चलने वाली इस कथा में सभी का सहयोग मिल रहा है। उन्होने बताया कि अत्याधिक गर्मी को देखते हुए कथा का समय दोपहर 4 बजे से 7 बजे किया गया है।
कथा के पहले दिन आचार्य राधारमण महाराज ने कहा कि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है इस पवित्र माह में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनंत गुना माना जाता है पद्मपुराण के अनुसार इस मास में भगवान विष्णु के नाम का जाप, व्रत कथा सुनना और दान करना मोक्ष और सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता हैं इसे आत्म शुद्धि का सबसे उत्तम समय माना गया हैं। उन्होंने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है,जब इसे हम अपने जीवन और व्यवहार में धारण करें। श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।
श्रीमद्भागवत कथा के माहात्म्य में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग के बारे मे बताया उन्होने बताया कि भक्ति महारानी ज्ञान और वैराग्य रूपी अपने दोनों वृद्ध पुत्रों के साथ कलियुग के प्रभाव से जीर्ण-शीर्ण हो जाती हैं, लेकिन भागवत कथा के प्रभाव से वे फिर से युवा और तेजस्वी हो जाते है। उन्होने धुन्धकारी गौकर्ण की कथा के भी प्रसंग सुनाये । कथा को सुनने के लिए शहरवासियांे के साथ आसपास के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आये । कथा आरम्भ से पूर्व श्रीमद भागवत जी की आरती की गई।

संपादक भावेश आर्य

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