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इन्फ्रा मेडि 2.0 संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी शो का हुआ आयोजन

नई दिल्ली(हरीश दवे) ।

इन्फ्रा मेडि 2.0 संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी शो का सफल आयोजन आज ले मेरिडियन, नई दिल्ली में किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, अनुसंधान, नीति निर्माण और उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया, जहाँ भारत के स्वास्थ्य अवसंरचना और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री लुम्बाराम चौधरी, माननीय सांसद (लोकसभा), जालौर-सिरोही, राजस्थान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ताओं के रूप में शामिल रहे:

डॉ. संगमित्रा पाटी, अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), नई दिल्ली

डॉ. मोना डुग्गल, निदेशक, ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन डिजिटल हेल्थ एंड डेटा साइंस

डॉ. रजनी कांत, निदेशक, ICMR-रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC), गोरखपुर एवं प्रमुख, नीति एवं संचार (ICMR)

इस संगोष्ठी में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने गोल्ड स्पॉन्सर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI), सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन सिद्धा (CCRS) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) की सक्रिय भागीदारी रही।

एनजीओ साझेदार लेडी सर्कल GMCLC160 और काराह फाउंडेशन ने सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हर्षवर्धन, प्रख्यात ईएनटी विशेषज्ञ एवं भारत सरकार के पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनकी उपस्थिति ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में सशक्त नीति नेतृत्व के महत्व को और अधिक रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दृश्य एवं अनुभवात्मक पहलुओं के सफल संचालन हेतु विजुअल मिथ्स की निदेशक सुश्री मीतू पॉल का विशेष योगदान रहा।

“विजन 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप, इन्फ्रा मेडि 2.0 ने एक सशक्त, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य

तंत्र के निर्माण पर जोर दिया, जो नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और सहयोगात्मक साझेदारी से संचालित हो। इस मंच पर इन्फ्रा मेडि 3.0 के आगामी संस्करण की भी घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य संवाद, नवाचार और सहभागिता को और व्यापक स्तर पर ले जाना है।

कार्यक्रम का समापन “विजन 2047” के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

संपादक भावेश आर्य

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