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अर्बुदा गौशाला व डेयरी फार्म में बजट घोषणा के अनुरूप डेयरी संयंत्र लगाने की मांग रखी हिन्दू वेव ने,सीएम के नाम जिला कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

सिरोही- 30 अप्रैल।

राज्य सरकार द्वारा सिरोही में डेयरी संयंत्र की बजट घोषणा के तहत मुख्यालय पर अर्बुदा गॉशाला व डेरी फॉर्म की खातेदारी भूमि पर डेरी उधोग स्थापित करने के लिये मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिला कलेक्टर को हिन्दू वेव के संयोजक हरीश दवे ने ज्ञापन सौपा।
मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में बताया कि सिरोही जिला मुख्यालय उधोग धंधों से वंचित है। यहां की मूलतः आबादी कृषि व पशुपालक है। आजादी के बाद सिरोही रियासत की पूर्व राज माता व स्व सेनानी व संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य स्व.गोकुल भाई भट्ट ने गोसंरक्षण, संवर्धन के लिए व नगर वासियो को शुद्ध दूध, दही, घी, पनीर मिल सके इसलिए करीब 5000 बीघा भूमि खातेदारी अर्बुदा गॉशाला व डेरी फॉर्म के लिए आरक्षित रखवाई।
उसका विधान पत्र बना जिसके अध्यक्ष जिला कलेक्टर व सचिव तहसीलदार नियुक्त हुए व 60 के दशक तक डेरी फॉर्म व गौशाला सुचारू चली। उसके बाद खातेदारी भूमि व उससे जुड़े कुएं अतिक्रमणों की चपेट में आये। गत कोंग्रेस सरकार में नियमो के विपरीत नंदी गॉशाला का उक्त भूमि पर करीब 1700 बीघा भूमि का एमयोयु हुआ। जिसकी वर्तमान भाजपा सरकार ने कोई समीक्षा नही की तथा अर्बुदा गौशाला व डेयरी फार्म की भूमि अतिक्रमणो की चपेट में व पशुधन सडक पर भटक रहा है तथा गोवंश को संरक्षण नही मिला व गोवंश पॉलीथिन खा कर मर रहा है।
अर्बुदा गौशाला से अतिक्रमण हटाने व उसकी समीक्षा की मांग 2 दशक से की जा रही है। लेकिन लोकल जन प्रतिनिधि भूमाफियाओं की मैच फिक्सिंग में अर्बुदा गोशाला की खातेदारी भूमि को दुर्दशा से उबारने में आगे नही आये। उलट किसी तहसीलदार या प्रशासनिक अधिकारी ने कार्यवाही की तो उसका ही तबादला कर दिया।
मुख्यमंत्री ने सिरोही में दुग्ध प्रस्ंसकरण व डेरी उद्योग के लिए बजट में घोषणा की है। आजादी के अमृत महोत्सव काल मे देश की आजादी के योद्धा व सिरोही के सपूत व आधुनिक राजस्थान के निर्माता स्व गोकुल भाई भट्ट की स्मृति में उनके द्वारा स्थापित अर्बुदा गौशाला व डेरी फॉर्म की खातेदारी भूमि में डेरी उद्योग का संयंत्र स्थापित करवाने की दिशा में जिला कलेक्टर से कार्यवाही करावे। जिला मुख्यालय पर डेरी उद्योग स्थापित होगा तो क्षेत्र की जनता व बेरोजगार व पशुपालकों की आजीविका के प्रचुर अवसर खुलेंगे।

संपादक भावेश आर्य

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