विहार सेवा का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन रविवार को पावापुरी तीर्थ में होगा

सिरोही(हरीश दवे) ।

जैन शासन में धर्म आराधना के साथ-साथ साधु संतो की सेवा श्रुसेवा में “विहार सेवा ’’ का भी एक प्रमुख स्थान हैं। विहार सेवा यानि जब साधु-साध्वी भगवंत पैदल विहार करते हैं उस वक्त उनके साथ-साथ पैदल यात्रा करना। प्राचीनकाल से यह व्यवस्था चली आ रही हैं जो आज भी अनवरत जारी हैं।
राजस्थान में विहार सेवा से जुडे हजारो कार्यकर्ताओं का एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सम्मेलन रविवार 18 जनवरी 2026 को श्री पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम में उसकी 25 वीं वर्षगांठ पर आयोजित ’’ रजत महोत्सव ’’ में आयोजित किया गया हैं।
विहार सेवा राजस्थान के प्रमुख निशित जैन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य भगवंत श्री उदयवल्लभसूरीश्वरजी एवं आचार्य श्री ह्रदयवल्लभसूरीश्वरजी की पावन निश्रा में यह प्रदेश स्तरीय सम्मेलन होगा जिसमें आचार्य भगवंत स्वयं सेवको को अपने उद्बोधन से उनका मार्गदर्शन करेगें। जैन साधु-साध्वियो की सुरक्षा, जैन धर्म के मूल सिद्धांतो के संरक्षण तथा युवा पीढी को धर्म-सेवा-संस्कारो से जोडने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलन में विचार मंथन होगा। पावापुरी ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन ने बताया कि राज्य में पहली बार आयोजित इस सम्मेलन का लाभ के पी संघवी परिवार मालगांव-सुरत-मुंबई ने लिया हैं। इस सम्मेलन में 1200 विहार सेवक भाग लेगें। विहार सेवा के प्रदेश उप प्रमुख कौशल जैन, सम्मेलन प्रभारी नितिन जैन व सहप्रभारी आयुष जैन ने बताया कि 200 से अधिक नगरो से विहार सेवक रविवार को प्रातः पावापुरी पहुच कर पुरे दिन सम्मेलन में भाग लेगें। इस विहार सेवा के प्रेरणादाता आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय महाबोधिसूरीश्वरजी म. सा. हैं जिनकी निश्रा में पुरे देश में युवाा वर्ग विहार सेवा का अद्भुत कार्य वर्षाे से कर रहा है। अभी हाल ही में पुना में राष्ट्रीय स्तरीय सम्मेलन आचार्यश्री की निश्रा में हुआ था। इस सम्मेलन में श्री पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम के संस्थापक के पी संघवी परिवार के प्रमुख किशोर भाई एच. संघवी भी भाग लेकर युवाओं को प्रोत्साहित कर युवाओं का अभिनंदन करेगें।
पावापुरी में उपधान व दीक्षा
पावापुरी में इन दिनों आचार्यश्री उदयवल्लभसूरीश्वरजी एवं ह्रदयवल्लभसूरीश्वरजी म. सा. की निश्रा में 47 दिवसीय उपधान तप यानि साधु जीवन का प्रशिक्षण चल रहा हैं जिसकी समापन संघ माला 26 जनवरी 2026 को होगी। आज आचार्य श्री की निश्रा में तखतगढ़ निवासी, मुमुक्षा सारा बेन विक्रम भाई साकरिया की भव्य दीक्षा हुई ओर सारा बेन आज सांसारिक जीवन से साधु जीवन में प्रवेश कर साध्वीश्री देवारिया श्रीजी बनीं।


संपादक भावेश आर्य



