आचार्य हेमवल्लभसूरीजी का देलवाड़ा जैन तीर्थ में सादगीपुर्ण चातुर्मास प्रवेश

सिरोही(हरीश दवे) ।

विश्व विख्यात श्री आबू देलवाड़ा तीर्थ में मंगलवार में प्रातः काल नेम के हेम, तपो गगन चन्द्रमा परम पुज्य आचार्य हेमवल्लभसूरीश्वरजी महाराज का हर्षोल्लास, विधि-विधान एवं सादगीपुर्ण चातुर्मास प्रवेश हुआ। इस पावन अवसर पर समूचा तीर्थ परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर हो उठा। बिना किसी आडंम्बर के ओर बिना किसी ढोल-ढमाको के साथ प्रातः वेला में गुरूजी हमने आपो आर्शीवाद एवं जय-जय श्री आदिनाथ के जयनांद के बीच आचार्यश्री ने तीर्थ परिसर में प्रवेश किया।
आचार्य श्री के मंदिर आगमन पर प्रवेश द्वार पर सेठ श्री कल्याण परमानन्द जी ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज कुमार गांधी, सचिव पारस मल सिंघवी, ट्रस्टी कुमार सेठ, राजीव सोलंकी, अनुभव सिघीं, मुख्य टीलायत परिवार के कमलेश चैधरी और दिलीप वहीत्रा, तीर्थ प्रबन्धक गोरधनसिंह व अन्य जैन श्रावको ने शास्त्रोंक्त विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ मन्दिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर उनका अक्षत से वधामणा कर भावभीना सामैया किया। आचार्यश्री ने तीर्थ में मूलनायक के रूप में विराजित भगवान श्री आदेश्वर दादा के दर्शन वंदन किए।
इस मांगलिक वेला पर संगीतज्ञ कमलेश चैधरी ने सुमधुर सुरों में मंगल गीतों की प्रस्तुति दी। मंगल गीतों की गूंज के बीच आचार्य भगवंत ने जयकारों के साथ तीर्थ परिसर के उपाश्रय में प्रवेश किया ओर मांगलिक श्रवण करवा कर सभी को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस वर्षावास में सभी को धर्म आराधना करते हुए ज्यादा से ज्यादा तप, आराधना करते हुए ज्ञान अर्जित करना हैं।
देलवाड़ा जैन तीर्थ पर यह पहला अवसर हैं जब यहां आजीवन आयंबिल के तपस्वी आचार्य भगवंत श्री हेमवल्लभसूरीजी चातुर्मास कर रहे हंै जो जैन समाज के लिए एक गौरव हंै। देलवाड़ा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज गांधी ने सकल श्री संघ सिरोही की ओर से आचार्य श्री हेमवल्लभसूरीजी के प्रति अंतःकरण से आभार प्रकट करते हुए, आचार्यश्री को कांबली अर्पित कर कोटी-कोटी वन्दन किया। चातुर्मास प्रवेश के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने भाग लेकर उनके दर्शन वंदन का लाभ लिया। आचार्यश्री ने सामुहिक मांगलिक सुनाकर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को इस अति प्राचीन तीर्थ एवं अलौकिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास हेतु आगे आने का आह्रवान किया। यहा यह खास उल्लेखनीय होगा कि देलवाड़ा तीर्थ की 1000 वी वर्षगांठ 2031 में है।



संपादक भावेश आर्य



