UPI पर MDR चार्ज: छोटे व्यापारियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, क्या नकद की तरफ लौटेगा भारत?

नई दिल्ली (हरीश दवे)।

15 अक्टूबर से भारत के डिजिटल पेमेंट परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के जरिए होने वाले व्यापारी ट्रांजेक्शन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) चार्ज लागू हो सकता है।
इस कदम का सीधा और सबसे गहरा असर देश के करोड़ों छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर पड़ने वाला है। अब तक UPI ट्रांजेक्शन पूरी तरह से फ्री थे, जिसके चलते गली-मोहल्ले के किराना दुकानदारों से लेकर चाय-समोसे वालों ने भी डिजिटल पेमेंट को खुशी-खुशी अपनाया था। लेकिन नए चार्ज लगने से उनकी कमाई का एक हिस्सा अब बैंक और पेमेंट कंपनियों के खाते में चला जाएगा।
उपभोक्ता से नहीं वसूल सकेंगे चार्ज
इस पूरी व्यवस्था में व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि वे यह MDR चार्ज ग्राहकों से नहीं वसूल सकते। यानी, उन्हें अपनी जेब से ही यह पैसा देना होगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।
यह छोटे व्यापारियों के लिए दोहरी मार है। एक तरफ जहां वे पहले से ही बढ़ती महंगाई और कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं, वहीं अब उन्हें अपनी पहले से ही कम मार्जिन वाली कमाई पर एक और चार्ज देना होगा। कई व्यापारियों का कहना है कि यह “जितना कमाते नहीं हैं, उतना उनके खुद के मुनाफे के पैसे पर चार्ज लगाना” जैसा है।
डिजिटल पेमेंट की बढ़ती रफ्तार को लगेगा झटका?
यह कदम उस समय उठाया गया है जब भारत डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया में अग्रणी बन रहा है। UPI ने नकद-रहित अर्थव्यवस्था की ओर एक बड़ा बदलाव लाया है। लेकिन अब व्यापारियों को डर है कि वे नकद लेनदेन की ओर वापस लौट सकते हैं।
छोटे व्यापारियों का तर्क है कि जब उन्हें हर लेनदेन पर चार्ज देना होगा, तो वे ग्राहकों को नकद में भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। यह डिजिटल इंडिया के सपने के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
एक चाय दुकानदार, ने कहा, “हम लोग तो पहले से ही मंदी से जूझ रहे हैं। अब हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज देना पड़ेगा तो हम तो बर्बाद हो जाएंगे। हमें तो फिर से कैश ही लेना पड़ेगा।”
भविष्य में क्या होगा?
इस चार्ज का डिजिटल पेमेंट पर क्या असर देखने को मिलता है, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार्ज डिजिटल पेमेंट को स्थायी बनाने के लिए आवश्यक है।
उनका कहना है कि पेमेंट कंपनियों को भी अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राजस्व की आवश्यकता है। हालांकि, छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण है।
अभी के लिए, छोटे व्यापारी इस नए बदलाव से चिंतित और डरे हुए हैं। क्या भारत सरकार और NPCI इस चिंता का कोई समाधान निकाल पाएगी? यह एक बड़ा सवाल है।


संपादक भावेश आर्य



