तपस्वी आचार्य हेमवल्लभ सूरीजी का अनादरा में मांगलिक प्रवेश 20 जुलाई को

सिरोही(हरीश दवे) ।

आबू तलेटी के नीचे बसे अनादरा गांव में वर्तमान की विरल विभूती, आजीवन आयंबिल के महान तपस्वी आचार्य भगवंत श्री हेमवल्लभसूरीजी का 20 जुलाई को प्रातः 5 बजे मंगल प्रवेश एवं सामैया होगा। आबू देलवाडा में चार्तुमास के लिए विहार के पूर्व आचार्यश्री जैन संघ अनादरा की ओर से आयोजित पंचान्हिका महोत्सव में निश्रा प्रदान करने पधार रहे हैं। आचार्यश्री जीवन भर आयंबिल यानि लूखा-अलुणा भोजन दिन में एक बार करने एवं उकाला हुआ गर्म पानी पीने की तपस्या पिछले कई वर्षो से कर रहे हैं ओर यह तपस्या उनकी आजीवन रहेगी। गिरनार तीर्थ के परम् भक्त एवं भगवान नेमीनाथ के महान उपासक आचार्यश्री पहली बार राजस्थान पधारे हुऐ हैं ओर सिरोही जिले के प्राचीन तीर्थो की पदयात्रा कर अपनी साधना कर रहे हैं। आपका इस वर्ष चार्तुमास आबू-देलवाडा-अचलगढ एवं अनादरा में हैं।
श्री अनादरा जैन संघ के ट्रस्टी अशोक भाई चैहान ने बताया कि 20 जुलाई सोमवार को प्रातः 5 बजे आचार्यश्री का सामैया के बाद मांगलिक प्रवेश होगा एवं प्रातः 8 बजे जिनशासन ही शरणभूत विषय पर प्रवचन होगा। दोपहर में श्री आबू देलवाडा तीर्थ की भाव यात्रा होगी एवं रात्रि में चैन्नई के धीरज निम्बजिया प्रभु भक्ति करोयेगें।
मंगलवार को दोपहर में 3 बजे जिनेश्वर भगवान के कल्याण विषय पर प्रवचन होगा एवं रात्रि में गुंटुर के अमित सालेचा एवं विजयवाडा के विलेश जैन गिरनार महातीर्थ की भाव यात्रा करवायेगें। बुधवार को प्रातः 8 बजे स्नात्र महोत्सव, दोपहर में श्रावक के आचार एवं आहार विषय पर प्रवचन एवं रात्रि में अहमदाबाद की स्वर लहरी प्रियंका जानी प्रभु भक्ति करायेगी। गुरूवार को प्रातः 9 बजे जीवन में धर्म का महत्व एवं दोपहर में जिनशासन की गौरव गाथा विषय पर आचार्यश्री का प्रवचन होगा। शुक्रवार को प्रातः 9 बजे एवं दोपहर 3 बजे महापुरूषों का चरित्र विषय पर प्रवचन एवं रात्रि में अहमदाबाद के संगीतज्ञ अमित वी जैन प्रभु भक्ति करवायेगें।
आचार्यश्री के अनादरा आगमन को लेकर अनादरा जैन संघ एवं ग्रामिणों में हर्ष की लहर हैं ओर दक्षिण भारत एवं मुंबई-सुरत-अहमदाबाद से बडी संख्या में प्रवासी श्रावक-श्राविकाएं अनादरा पहुचना शुरू हो गये हैं।
अनादरा के इतिहास में यह पहला अवसर हैं जब इतने बडे तपस्वी आचार्य इस क्षेत्र में पधार रहे हैं। यह खास उल्लेखनीय हे कि अनादरा गांव मांडोली के परम पूज्य आध्यात्मिक योगी आचार्य श्री शांतिसूरीश्वरजी महाराज की साधना भूमि रही हैं।


संपादक भावेश आर्य



