सिन्दरथ में साक्षात उतरी गोकुल नगरी, धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, भजनों पर झूमें श्रद्धालु

जीवन में विकारों का घोर अंधकार छा जाए, तब अंतःकरण में होता है गोविंद का प्राकट्î – पंडित ओझा
सिरोही(हरीश दवे) ।

शहर के समीपवर्ती सिन्दरथ गांव के श्री रामेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में चल रहे सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को साक्षात गोकुल सा नजारा देखने को मिला। कथा के सबसे दिव्य और मुख्य प्रसंग श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर समूचा पंडाल कृष्ण भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। भगवान के प्राकट्य उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में ऐसा अभूतपूर्व उत्साह था कि बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया। कथा में जैसे ही कंस के कारागार में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप में प्रकट होने और वासुदेव जी द्वारा नन्हे कन्हैया को टोकरी में लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने का सजीव प्रसंग सुनाया गया, वैसे ही पूरा पंडाल शंखध्वनि, घंटों की आवाज और हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की तथा नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। भगवान के बाल स्वरूप को पालने में विराजमान कर भव्य झांकी सजाई गई। वृंदावन के विट्ठल म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने जब बधाई गीत और सोहर गाए, तो यजमान परिवार सहित पंडाल में उपस्थित महिला-पुरुष श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और जमकर नृत्य किया। इस दौरान पूरे पंडाल में अबीर-गुलाल उड़ाया गया और खिलौने, माखन-मिश्री व मिठाइयों का प्रसाद लुटाया गया।
कंस का वध और कारागार के बंधन का आध्यात्मिक पक्ष
व्यास पीठ से कथाव्यास पंडित जनार्दन ओझा ने कहा कि जब-जब धरती पर अन्याय, अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब भगवान स्वयं लोकहित में अवतार लेते हैं। उन्होंने कंस के अत्याचारों से त्रस्त जनता की पीड़ा का उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ । उन्होने कृष्ण जन्म के आध्यात्मिक पक्ष को समझाते हुए कहा कि कंस का कारागार और लोहे की बेड़ियां कुछ और नहीं बल्कि मनुष्य का अहंकार और सांसारिक मोह-माया का बंधन हैं। जब जीव के जीवन में पाप और कष्टों का घोर अंधकार छा जाता है, तब भगवान कृष्ण का प्राकट्य होता है। प्रभु के आते ही कारागार के ताले अपने आप टूट जाते हैं और पहरेदार सो जाते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए अंतःकरण को शुद्ध और पवित्र बनाना अनिवार्य है। उन्होने कथा में भगवान श्री राम के जन्म और राजा बलि के उद्धार हेतु वामन अवतार की कथा का भी बहुत ही सुंदर और मर्मस्पर्शी वर्णन किया। चौथे दिन भी कथा का प्रारंभ पारंपरिक वैदिक पद्धति से हुआ। वेद पाठी पंडितो ने दिव्य वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नित्य परायण किया। मंच संचालक कार्तिकेय शर्मा द्वारा किया गया।
़श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के इस महा-आयोजन में पूरी व्यवस्था को सभालने में भगवतीलाल ओझा,पुखराज, अशोक ,बाबूमल, नरेश, बबलू , सुरेश, भंवर,, महेंद्र ज दवे, हेमंत ओझा, नरेंद्र ओझा, मनीष त्रिवेदी मोहित शर्मा, आदित्य वसेटा, पूजा सोनी, सोनू सोनी, पुनीता सोनी, सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने सहयोग दिया। अंत में भगवान बालकृष्ण की छप्पन भोग के साथ भव्य महाआरती उतारी गई और उपस्थित सभी भक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया।


संपादक भावेश आर्य



