रामझरोखा मंदिर के प्रवेश द्वार से टेंट हटाए – महंत राजगुरु सीताराम दास,

रामझरोखा पंजीकृत ट्रस्ट मंदिर में नियंत्रण एंव सलाहकार के नाम असामाजिक तत्वों से मंदिर को निजात दिलाने की प्रशासन से की मांग,
सिरोही 7 जून(हरीश दवे)।

रामझरोखा मन्दिर की सम्पति को हडपने,खुर्द बुर्द करने का षडयंत्र व झुठी शिकायते कर मंदिर प्रबंधन को प्रभावित करना रामझरोखा मन्दिर की सम्पति को हडपने,खुर्द बुर्द करने का षडयंत्र दशको से चल रहा है। व विभिन्न किराए दार औने पौने दाम में सम्पति हड़प बैठे है। तथा खुर्द बुर्द करने वाले व नियंत्रण एंव सलाहकार समिति की आड़ में षड्यंत्र पूर्वक अब सामाजिक तत्व मंदिर परिसर में कब्जा कर,साधू सन्यासियो को हडकाने के साथ, मंदिर प्रबंधन से जुड़े तत्वों का हैरान परेशान व आंतकित कर,परेशान कर, पुरे मंदिर परिसर को गंदगी का साम्राज्य बना चुके है। वही मंदिर के बहार हो रही,कथा से किसी को आपत्ति नही,लेकिन मंदिर के मुख्य द्वार पर टेंट लगा श्रदालुओं के आवागमन के मार्ग को भी बंद कर दिया है। जिसकी शिकायत पुलिस प्रशाशन व उपखंड अधिकारी को भी की,लेकिन राजनैतिक कारणों से जिला प्रशासन न तो सुरक्षा प्रदान कर रहा है। न’ ही रामझरोखा के प्रदूषित व गरिमा व मर्यादा के विपरीत हो रहे आचरण पर कार्यवाही करता। महंत राजगुरु सीताराम दास ने विज्ञप्ति जारी कर, बताया की जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को लिखित में शिकायत व सुरक्षा की मांग की आये दिन मुझसे जुड़े हुए व्यक्तियों व मन्दिर प्रबंधक के लोगो को डराया धमका या जा रहा है।
व जो भी असामाजिक तत्व विभिन्न हथकंडों से नगर के हिन्दू समाज को भृमित कर रहे है।
दुख की बात है।
महन्त ने बताया की में गुरु शिष्य परम्परा के तहत गादीपति महंत हु। नियंत्रण एव सलाहकार समिति अप्रासंगिक है। जिन्होंने सदैव झुठी शिकायते कर मंदिर प्रबंधन को प्रभावित कर, अधिकार छिनने की कोशिश की है। और अब जिस तरह उन्होंने मंदिर के बोर्ड, उखाड़ छदम बोर्ड लगा रसीद उगाही कर, जो भी अवैधानिक कार्य किया है। जिला प्रशासन इनके खिलाफ कार्यवाही नही कर रहा जिनसे इनके हौसले बुलंद है। तथा न्यायालय के निर्देशों की अवमानना हो रही है।
जिनका अधिकार क्षेत्र नही है व मन्दिर परिसर व दरवाजे के बाहर नियमो के विपरित लगे दरवाजे के बाहर भक्तो की आफत टेंट को दुरस्त नही किया।
आयुक्त व उपखंड अधिकारी व जिला प्रशशन ने वाजिब कार्यवाही कर रामझरोखा मंदिर में न्यायालय की अवमानना व मंदिर में अनाधिकृत गत्तिविधियो व खुर्द बुर्द करने की साजिशो के खिलाफ उचित करवाई नही की तो अब न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी ।



संपादक भावेश आर्य



