कोम्प्लेक्स के पास गली की सड़क खोद डाली नगर परिषद बेखबर,चट्टाने कांट की जमीन समतल,जिम्मेदार अधिकारी बेखबर

सिरोही(हरीश दवे) ।

भूमाफियाओं की तीर्थ स्थली जिला मुख्यालय सिरोही में कार्यवाहक आयुक्त, मैच फिक्सिंग बोर्ड व निजी करो के उधोग में नगर परिषद के कोष को जिम्मेदार अधिकारियों ने करोड़ो का नुकसान दे कर पूरे नगर में तालाब,नदी,नाले, पहाड़ी,सार्वजनिक मार्ग सर्वत्र अतिक्रमणों का उधोग पनपा दिया है।
जिसका परिणाम सिरोही की जनता भुगतने को मजबूर है।
व नगर में नियमो के विपरीत बिना सेट बेक छोड़े मुक्य बाजार, चौराहों में आवसीय शुल्क अदा कर सरकारी भूमि व नालियों पर भी अतिक्रमण कर दिया है।
जिस को नगर परिषद सिरोही के भ्रष्ट सिस्टम का का संविदा कर्मी राज व आर आई,आरओ,कार्य वाहक आयुक्त बनते रहे व भूमाफिया नियमो के विपरीत अपने कारनामे ईजाद करते रहे है।
व नए आयुक्त लगने के बाद अवैध अतिक्रमणों की सुनामी बढ़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुराने बस स्टैंड रोड पर स्थित श्री देवेश्वर महादेव मंदिर के सामने गत कोंग्रेस सरकार के समय से बन रहे वेध/अनाधिकरुत बांधकाम में बिल्डर्स ने दोनों सरकारों में अपनी मीनार का कार्य पूरा किया व चट्टाने कांट जमीन समतल कर पत्थर ठिकाने लगाया जिस में खनन विभाग ने नगर परिषद का हवाला दे कर पल्ला झाड़ा।
अब इसी लाइन में खेतलाजी के सामने जेसीबी से अवैध तरीके से खनन हुआ।
जो सचिव नगर परिषद रमेश विश्नोई के संज्ञान में भी लाया की निर्माणधीन कोम्प्लेक्स के पास दसकों पूर्व बनी 30/40 फिट की सड़क सिकुड़ती गई व आगे अतिक्रमण हुए अब उसी सड़क को उखाड़कर पास ही स्थित पहाड़ी के भाग को भी गहराई तक खोद डाला इसी गली में आवासीय मकान राशन की दुकान सहित बहुत बड़ा मंदिर आया हुआ है जिसका आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है
कोम्प्लेक्स के पास स्थित गली की सड़क और पहाड़ी के कुछ भाग को उखाड़कर आखिर नगर परिषद के स्वामित्व वाली सड़क और पहाड़ी को किसने उखाड़कर सरकारी संम्पति को खुर्दबुर्द कर नुकसान कारित कर दिया पर नगर परिषद सिरोही के जवाबदार अधिकारी जानबूझकर कर बेख़बर है या नगर परिषद सिरोही के अधिकारियों की अंदरूनी मिलिभगत का नतीजा है जो कोई हो सरकारी संम्पति तो खुर्दबुर्द अवश्य हुई है!
नव नियुक्त आयुक्त जोधाराम विश्नोई के शिरोही में पद भार ग्रहण करने के बाद नगर वासियो में संभावना जगी थी की अब नगर के हाल सुधरेंगे पर उनके आगमन के बाद स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण तेज गति से बढ़ गए है।


संपादक भावेश आर्य



