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सम्पूर्ण विश्व मे सनातन धर्म की पुनर्स्थापना के लिए 46 दिवसीय 200 कुंडी विराट यज्ञ पुष्कर तीर्थ में सम्पन्न

सिरोही(हरीश दवे)।

परम पूज्य यज्ञ सम्राट स्वामी श्री प्रखर जी महाराज के सानिध्य में संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की स्थापना एवं आतंकवाद आदि अपड्रेगन के संबंध के वास्ते 2000 त्रिकाल संध्या वंदन लिस्ट ब्राह्मणों के द्वारा 46 दिवसीय 200 कुंडिया विराट शत गायत्री पुरुष चरण महायज्ञ 8 मार्च से 19 अप्रैल 2026 मणि वेदिका पीठ पुष्कर राजस्थान से संपन्न कर लौटे खुशवंत त्रिवेदी ने अवगत कराया कि सतयुग में ऐसा यज्ञ पूरे विश्व में प्रथम बार हुआ 5000 वर्ष पूर्व महर्षि विश्वामित्र ने सत्र गायत्री पुरुष चरण यज्ञ संपन्न किया था और अब कलयुग में अभी संपन्न हुआ है यह यज्ञ सनातन धर्म की स्थापना एवं आतंकवाद आदि अपड्रेगन के समान भ्रष्टाचार से मुक्त शांति आदि व्याधियों से मुक्त कराने हिंदू राष्ट्र की स्थापना संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की स्थापना अखंड भारत बनाने भारतवर्ष में वेद मर्यादा अनुरूप चतुर वर्ण व्यवस्था सनातन धर्म प्रतिष्ठावां व प्रतिष्ठा गोवंश भक्त सेवा भाव जागरण और पूर्ण सुरक्षा शास्त्र मर्यादा अनुसार संचालित मठ मंदिरों की सुरक्षा व संवर्धन मातृशक्ति की शास्त्रोक्त मर्यादा अनुसार संवर्धन व सुरक्षा पिता, पुत्र, भाई, बहन और सामाजिक संबंध व परस्पर श्रद्धा भक्ति प्रेम स्नेह की पुनः प्रतिष्ठा ब्राह्मण को मानव, देव, पितृ, गोवर्धन, आदि के पोषण नदी पर्वत जल संसाधन वृक्ष लता दिव्य औषधि समस्त प्राकृतिक संपदा पूर्णतया संरक्षण संवर्धन को पुरस्कार विश्व कल्याण अर्थ भारतीय शिक्षा गुरुकुल शिक्षण पद्धति को श्रद्धापूर्वक समाज में आधारित हो। त्रिवेदी ने बताया की भारत, पुणे, विश्व गुरु बने विराट पुरुष संत महात्मा ब्राह्मण सभी की इसमें रुचि बने शास्त्रों में रुचि बने एवं धर्मशास्त्र अनुसार शास्त्र, पितृ, तर्पण आदि में नियमित भक्ति, श्रद्धा की प्रवृत्ति बन इस पवित्र महान कार्य निस्वार्थ भाव से संस्कारित शस्त्रोक्त पध्दति से सम्पन्न हो।

संपादक भावेश आर्य

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