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लोढ़ा ने वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व विकास को लेकर वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य को लिखा पत्र

वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व के विकास की और किया ध्यान आकर्षित

अतिरिक्त मुख्य सचिव से फोन पर बात कर सिरोही जिले का दौरा करने का किया आग्रह

सिरोही(हरीश दवे) ।

पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार को पत्र लिखकर वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व के विकास पर ध्यान देने का आग्रह किया हैं। साथ ही लोढ़ा ने अतिरिक्त मुख्य सचिव से दूरभाष पर बातचीत कर उन्हें सिरोही जिले का दौरा करने का आग्रह किया।

पिछले माह ही लोढ़ा ने 4 घंटे तक कंजर्वेशन रिजर्व का अवलोकन कर मैनेजमेंट प्लान की क्रियान्विति की जानकारी ली थी।

लोढ़ा ने पत्र में बताया हैं कि वन मंडल सिरोही में स्थित वाडाखेड़ा कंजर्वेशन रिजर्व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 36 ए सहपाठित धारा 18 में दिनांक 27 12 2022 को राज्य सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया है परंतु लगभग 4 साल होने के बावजूद भी उसका समुचित विकास नहीं हो रहा है l पिछले वर्षों में वार्षिक कार्य योजना अर्थात एपीओ की क्रियान्वित्ती में बहुत धीमी गति से प्रगति हो रही है l वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 की धारा 36 ए के नोटिफिकेशन जारी होने की दिनांक 27 12 2022 से ही इसका स्टेटस सेंचुरी जैसा ही है जिसमें एक्ट की धारा 27 की उप धारा दो तीन एवं चार तथा धारा 30 तथा 32 एवं 33 की उप धारा बी एवं सी के अनुरूप अभी तक अपेक्षित पालन नहीं हो पा रही है l इसके अलावा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 64 में प्रदत्त अधिकारों के तहत दिनांक 6 जून 1977 को नोटिफिकेशन जारी कर वन्य जीव संरक्षण राजस्थान रूल्स 1977 घोषित है जिसके संशोधित नियम 1990 के नियम तीन के अनुरूप कंजर्वेशन क्षेत्र में पर्यटन के प्रवेश बाबत कोई गाइडलाइन अथवा शर्तें प्रधान मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक द्वारा जारी नहीं किए गए हैं l इस हेतु शीघ्र ठोस कार्रवाई अपेक्षित है ताकि उक्त क्षेत्र का वन्य जीवों के संरक्षण विकास प्रजनन एवं संख्या में अभिवृद्धि हो सके।

उल्लेखनीय है कि जोधपुर के आसपास काले हिरणों की आबादी के बाद लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर इस क्षेत्र में दुर्लभ काले हिरण इस कंजर्वेशन क्षेत्र वाडाखेड़ा में पाए जाते हैं इसलिए 10 वर्षीय मैनेजमेंट प्लान के अनुरूप प्रगति वार्षिक कार्य योजना की शत प्रतिशत पालना भी तीव्र गति से करना अति आवश्यक है जिसमें मुख्यतः नेचर ट्रेल्स, सफारी पार्क, वॉच टॉवर्स, इंटरप्रिटेशन सेंटर, मुख्य मार्गों पर चेकिंग, चेक पोस्ट, वाटर होल्स घास क्षेत्र को बढ़ावा आदि मुख्य है। इस हेतु एक अलग से क्षेत्रीय वन अधिकारी का पदस्थापन भी होना अति आवश्यक है।उसके साथ फील्ड स्टाफ के अतिरिक्त पद स्वीकृत करने अति आवश्यक है क्योंकि यह लगभग 4331हेक्टेयर का एक बहुत बड़ा एवं जिला मुख्यालय से सटा हुआ क्षेत्र है इसके विकास से जिले की पहचान तो बनेगी ही इसके अलावा मुख्य टूरिस्ट पॉइंट होने से राज्य सरकार की एवं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने से आए भी बढ़ेगी तथा वन्यजीवों के प्रति आकर्षण से उनके संरक्षण में इजाफा होगा।

संपादक भावेश आर्य

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