भारी भ्रष्टाचार के चलते सिरोही नगर परिषद की भूमि पर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से बनाये पट्टे निरस्त करने की माँग पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार लोढ़ा मिले जिला कलेक्टर एवं नगर परिषद प्रशासक से ।

सिरोही(हरीश दवे) ।

पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार व पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी एवं सिरोही नगर परिषद प्रशासक अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेश गोयल से मिल कर बताया कि सिरोही नगर परिषद के स्वामित्व की भूमि मौजा ग्राम सिरोही प्रथम में पुराने खसरा संख्या 1076/1 मी और नए खसरा संख्या 1298 रकबा 0.0300 हेक्टेयर व पुराने खसरा संख्या 1075 नए खसरा संख्या 1300 रकबा 0.1700 हेक्टेयर ग़ैर मुमकिन आबादी में एवं खसरा संख्या 1298 जो सड़क दर्ज है और नगर परिषद सिरोही के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है | संपूर्ण भूमि पर निजी व्यक्तियों के नाम भारी भ्रष्टाचार के चलते ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से 69A में पट्टे जारी कर दिए गए है ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया की नगर परिषद सिरोही द्वारा सड़क और आबादी भूमि राजस्व रिकॉर्ड दर्ज अनुसार उनकी स्वयं की होते हुए भी फर्जी व विधि विरुद्ध तरीके से करोड़ो रुपये की मूल्यांकन संपत्ति का धारा 69A के तहत विधि विरुद्ध प्रक्रिया अपना कर व मिलीभगत करके फर्जी तरीके से आयुक्त व अन्य कर्मचारियों ने मिल कर फर्जी पट्टा विलेख नियमों के परे जाकर जारी कर दिए जो कि उक्त भूमि करोड़ों रुपये के सम्पत्ति का पट्टा विलेख जारी कर राजकोष को नुकसान पहुंचाया है जो की सम्पत्ति सिरोही से शिवगंज मुख्य रोड पर स्थित है
लोढ़ा ने बताया कि नगर परिषद द्वारा 69A के तहत जय सिंह व अन्य को बेचान इकरार पर धारा 69A के तहत पट्टा विलेख जारी कर घोर अनियमितता कारित की है l ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही कर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की परिषद की सम्पत्ति को धारा 69A के तहत जो पट्टे जारी किए गए है जिनको निरस्त किया जाना आवश्यक है l
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया कि उपखण्ड अधिकारी हरि सिंह देवल के समक्ष जय सिंह द्वारा धारा 136 भू राजस्व अधिनियम के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जबकि राजस्व रिकॉर्ड में उसके नाम से कोई कृषि आराजी नहीं है फिर भी रिकॉर्ड शुद्धीकरण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया व जिस बाबत पेश किया है स्पष्टतया यह भूमि नगर परिषद सिरोही के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी और जिसे जानबुझकर नगर परिषद को पक्षकार नहीं बनाया गया है व न ही न्यायालय में उसे सुनवाई का कोई मौका दिया गया केवल मात्र मिलीभगत कर राजनीतिक दबाव में आकर ग़लत रूप से दिनांक 10.01.2025 को निर्णय पारित किया गया ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया कि 10.01.2025 के निर्णय में न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है कि प्रार्थी जय सिंह खातेदारी स्वंय स्वामित्व आधिपत्यों को उसकी पुष्टि नहीं करता है मात्र त्रुटि की शुद्धि के हद तक संशोधन करने बाबत आदेश पारित किया गया । जबकि उक्त आदेश पारित करने से पूर्व नगर परिषद सिरोही के नाम से उक्त आदेश पारित करने से पूर्व नगर परिषद सिरोही के नाम से भूमि दर्ज थी जो आवश्यक पक्षकार होते हुए भी उसे सुनवाई का मौका नहीं देकर गलत निर्णय पारित किया गया ।
लोढ़ा ने बताया कि वर्तमान में उक्त भूमि नगर परिषद सिरोही के नाम से है फिर भी नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त और कर्मचारियों द्वारा प्रार्थी से मिलीभगत कर फर्जी व कूटरचित तरीके से जो पट्टा विलेख धारा 69A के तहत दिनांक 30.05.2025 को जारी किया है , जिसके पट्टा संख्या 11 से 37 है, जो सर्वथा ही नियमों के विरुद्ध व भ्रष्टाचार में लिप्त होकर गलत जारी किए गए है जो निरस्त किए जाने योग्य है ।
लोढ़ा ने बताया कि उपखण्ड अधिकारी द्वारा राजनीतिक दबाव में आकर व भ्रष्टाचार में लिप्त होकर नगर परिषद सिरोही को जानबुझकर बिना सुनवाई का मौका दिए जो आदेश पारित किया है वो सर्वथा ही पूर्ण रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध होने से ग़लत जारी किया है ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही किया जाना अपेक्षित है ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया कि उपखण्ड अधिकारी सिरोही के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में ईश्वर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनकी पत्नी श्रीमती नंदकुंवर व नाबालिग पुत्री राजकुमारी की और से रजिस्टर्ड विक्रय विलेख के ज़रिए उक्त आराजी रीडमल सिंह राणावत पुत्र राम सिंह जी निवासी बीजापुर को दिनांक 17.07.1972 को बेचान विलेख के ज़रिए बेचान की गई जबकि उक्त विक्रय विलेख में कोई खसरा संख्या अंकित नहीं है व बिना खसरा नम्बर अंकित करते हुए बेचान की गई है जबकि कानूनन बिना खसरा संख्या के अवैध व शून्य है ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया कि तत्पश्चात रिडमल सिंह द्वारा एक वसीयतनामा जय सिंह झाबुआ के नाम से होना बताते हुए प्रार्थना पत्र रिकॉर्ड में शुद्धिकरण बाबत उपखण्ड अधिकारी के समक्ष पेश किया जबकि जय सिंह के नाम से कोई आराजी दर्ज नहीं थी व न ही उक्त वसीयतनामा कोई रजिस्टर्ड दस्तावेज है एवं बिना पंजीकृत वसीयतनामा के उपखण्ड अधिकारी जानबूझकर प्रार्थी जय सिंह को कोई हक व अधिकारी नहीं होते हुए मिलीभगत कर जो आदेश पारित किया गया है, गलत पारित किया गया है ।
लोढ़ा ने बताया कि प्रार्थी जय सिंह उपखण्ड अधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश करने का कोई अधिकार नहीं था बल्कि उक्त वसीयतनामा भी अपने आप में संदेहास्पद है जो पंजीकृत दस्तावेज नहीं है एवं न ही न्यायालय द्वारा कोई घोषणा ही अपने हक में प्राप्त की है, फिर भी उपखण्ड अधिकारी ने राजनीतिक दबाव में फर्जी तरीके से भ्रष्टाचार में लिप्त होकर कानून का मखौल उड़ाते हुए जो आदेश पारित किया गया है वो पूर्णरूप से ग़लत है और ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही किया जाना आवश्यक है ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में बताया कि कानूनन रिकॉर्ड शुद्धि बाबत प्रार्थना पत्र वही पेश कर सकता है जिसके स्वयं के नाम से कोई भूमि हो जबकि इस प्रकरण में प्रार्थी जय सिंह के नाम से कोई भूमि रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी बल्कि वह नगर परिषद सिरोही के नाम से दर्ज थी । ऐसी स्तिथि में उक्त प्रार्थना पत्र मेंटेनेबल नहीं है ।
लोढ़ा ने ज्ञापन में निवेदन किया की उपरोक्त सम्पत्ति बाबत फर्जी तरीके से जारी किए गए पट्टा विलेख को निरस्त कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए ताकि उक्त सम्पत्ति को बचाया जा सके ।

संपादक भावेश आर्य



