पशुपालन विभाग में बवाल : डॉ. अमित चौधरी को एपीओ करने के फैसले के खिलाफ कर्मचारियों का बड़ा विरोध

चतुर्थ श्रेणी से लेकर वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारियों तक ने बांधी काली पट्टी,
फैसले पर उठे तीखे सवाल
ज्यादातर कर्मचारियों ने किया विरोध, कुछ चुनिंदा कर्मचारी दूर रहे — विभाग में चर्चाओं का दौर
सिरोही(हरीश दवे) ।

श्री लीलाधारी महादेव पशु मेले से जुड़े विवाद के बाद पशुपालन विभाग द्वारा संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डॉ. अमित चौधरी को एपीओ किए जाने के निर्णय के खिलाफ अब विभाग के अंदर खुलकर विरोध सामने आने लगा है। इसी निर्णय के विरोध में आज पशुपालन विभाग के कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और फैसले को लेकर नाराजगी व्यक्त की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विरोध प्रदर्शन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर कंपाउंडर, पशु चिकित्सा अधिकारी और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी तक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विभागीय निर्णय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
कर्मचारियों का कहना है कि जिस मामले को लेकर कार्रवाई की गई है, उसमें कई प्रशासनिक पहलुओं पर अभी भी सवाल बने हुए हैं। ऐसे में बिना स्पष्ट जांच के किसी अधिकारी को एपीओ करना उचित नहीं माना जा रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि इस तरह के निर्णय से विभागीय कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
विरोध में अधिकांश कर्मचारी शामिल, कुछ कर्मचारियों के दूर रहने पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार विरोध प्रदर्शन में विभाग के अधिकांश कर्मचारियों ने भाग लिया, लेकिन कुछ चुनिंदा कर्मचारियों के इसमें शामिल नहीं होने की भी चर्चा रही। हालांकि उनके विरोध से दूर रहने के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर इसे लेकर चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।
पशु मेले के विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि मंडार में आयोजित श्री लीलाधारी महादेव पशु मेले के उद्घाटन समारोह के दौरान प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद विभाग ने संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डॉ. अमित चौधरी को एपीओ कर दिया था।
अब कर्मचारियों के इस विरोध के बाद मामला और भी गर्माता नजर आ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वास्तविक जिम्मेदारी तय किए बिना कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है और विभाग को इस पूरे मामले पर स्पष्टता लानी चाहिए।


संपादक भावेश आर्य



