नाले व उद्यान की भूमि पर अतिक्रमणो को दे रही नगर परिषद् संरक्षण

एलएनटी ने सिवरेज की लाईन से नहीं जोड़ा नाला, नगर परिषद् ने करवा दिया अतिक्रमण
सिरोही, 07 जनवरी। (हरीश दवे)।

राजस्थान सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद भी सिरोही जिला मुख्यालय की नगर परिषद् को आयुक्त पद पर किसी भी अधिकारी की ताजपोशी नहीं हुई। इसी का परिणाम है कि आयुक्त व अन्य कार्मिकों के दर्जनो पद रिक्त होने के साथ संविदा कर्मियों के भरोसे नगरपरिषद् का प्रशासन चल रहा है जिसमें राजनैतिक हस्तक्षेप के चलते भ्रष्टाचार चरमसीमा लांघ चुका है तथा मुख्यालय पर अनाधिकृत निर्माण कार्य अस्थायी निर्माण के साथ फर्जी पट्टो के मामले में नगरपालिका प्रशासन तथा राज्यमंत्री व उनके पुत्र पर विपक्षी आरोप जड रहे है। वहीं कार्यवाहक आयुक्त आशुतोष आचार्य माउण्ट आबू नगरपालिका का कार्यभार संभालते सिरोही नगर परिषद् के प्रशासन पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं और उनके मातहत कार्मिक नगर की जनता को रात्रिकालीन विद्युत सुविधा ठेके होने के बावजूद भी सड़क के खड्डो से निजात नहीं दिला पा रहे है तथा अर्बुदा गौशाला के एमओयू के भ्रष्टाचार पर मौजूदा सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की और पूरा नगर बेसहारा पशुओं व पॉलिथिन चरते गोवंश से अटा पडा है व आमजन गोवंश की समस्या से त्रस्त है।
जिला मुख्यालय के सबसे अहम मार्ग कलेक्टर निवास से सरूपविलास तक गौरव पथ पर भाजपा जिलाध्यक्ष व राज्यमंत्री के ध्यान में लाने के बाद नगरपरिषद् ने पालिका बाजार के बाहर खड्डे व 20 साल से बंद पडे नाले को गहरी राजनीति के बाद ढकने का प्रयास तो किया लेकिन बस स्टेण्ड़ के बाहर नाले को जस का तस रख कांजी हाऊस के बाहर तक नगर परिषद् के ठेकेदार ने नाले को ढका लेकिन समीप के ही सभी घरो के अन्दर एलएनटी ने सिवरेज का चैम्बर तो बना दिया लेकिन सिवरेज के पानी को सिवरेज लाईन से नहीं जोड़ा और इस भ्रष्टाचार में एनएलटी व नगर परिषद् दोनो की मिलीभगती हैं जहां नगरपरिषद् का सहायक अभियन्ता पंकज गुर्जर का कहना है कि हमने एलएनटी को नोटिस दिया। जबकि एलएनटी का कहना है कि हमने सिवरेज चैम्बर बनाया लेकिन सिवरेज की लाईन से हम जोड नहीं पाये क्योंकि वहां के निवासी झगडा करने को उतारू होते है और हमने ये बात जिला प्रशासन को भी अवगत करायी। लेकिन जिला प्रशासन व नगर परिषद् ने सिवरेज की इस समस्या का समाधान नहीं किया तथा ढके हुए नाले के अन्दर ही सिवरेज के पानी का जल भराव होगा जो भविष्य में समस्या सृजित करेगा व वर्तमान में भी खुले पडे नाले में सिवरेज का पानी व गन्दगी की भरमार होने से वहां के निवासी नारकीय वातावरण में जीने को मजबूर है।
लेकिन एलएनटी व नगरपरिषद् के बीच के सिवरेज गडबड झाले में नगरपरिषद् के ठेकेदार ने आधा नाला तो ढक दिया लेकिन राजनैतिक व सिरोही नगर परिषद् प्रशासन के संरक्षण के चलते इस पूरे नाले मार्ग पर अतिक्रमण का जबरदस्त व्यवसाय पनपा दिया है। जहां अवैध तरीके से दुकाने व स्टॉल अस्थायी रूप से लग गये है जो गौरव पथ में आवगमन को बाधित कर रहा है जहां एक तरफ शराब की दुकान से निकलने वाले नशेडी तथा श्रीराम मार्केट के बाहर अस्थायी अतिक्रमण अवैध पार्किंग व वाहन स्टेण्ड़ो में आमजन का वहां से आवागमन मे गुजर पाना मुश्किल है व आमजन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होता है तथा जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी इसी मार्ग से गुजरते हैं लेकिन बस स्टेण्ड से जेल चौराहे तक का मार्ग दुर्घटनाओं का सबक बन गया है। इसी तरह नगर परिषद् के अधीन अखेलाव तालाब के किनारे दुर्दशा का शिकार सुभाष गार्डन जिसकी रैलिंग, घास, पेड पौधे सुख रहे है। रात्रि में लाईटे नहीं है और कार्यवाहक आयुक्तो के कार्यकाल में नगर परिषद् प्रशासन व भूमाफियाओं की मिलीभगत व कुछ जनप्रतिनिधियों के संरक्षण मंे सुभाष गार्डन में आवासीय भवन भी अवैध तरीके से निर्मित हो गया है। जिसको लेकर मोहल्ले वासियों ने अनेक शिकायते की और कार्य को रोका भी गया लेकिन परिषद् कार्मिको की दरीया दिली से सुभाष गार्डन भी अतिक्रमणो की भेट चढा व नागरिक यह कहते नहीं थक रहे है कि रामझरोखा की सम्पत्ति पर जारी किये पट्टो की तरह यहां पर भी कहीं नगर परिषद अवैध पट्टे जारी न कर दे।
क्या कहते है कार्यवाहक आयुक्त
सिरोही नगर परिषद् के कार्यवाहक आयुक्त आशुतोष आचार्य से इस बाबत् पूछे जाने पर उन्होने बताया कि नाले के अधूरे काम को पूरा करने के निर्देश सहायक अभियन्ता व ठेकेदार को जारी कर दिये है लेकिन सुभाष गार्डन व नाले के ऊपर हुए अतिक्रमण की मुझे जानकारी नहीं है और इसकी जाँच करवाकर अतिक्रमणो के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।
हालांकि सिरोही नगर परिषद् मंे अभी प्रशासक लगा हुआ है तथा भ्रष्टाचार के आरोपो में घिरी सिरोही नगर परिषद् के हालात सुधारने मंे राज्यमंत्री व जिला प्रशासन ने वाजिब कार्यवाही शहरवासियो को जन समस्याओं से निजात नहीं दिलायी तो इसका खामियाजा सत्ता सिन पार्टी को आगामी चुनावो में भुगतना पड सकता है।






संपादक भावेश आर्य



