रामझरोखा की फिजिकल फाइल नहीं चली तो निलंबन क्यों नहीं, फाइल गायब है तो एफआईआर क्यों नहीं

-सिरोही का रामझरोखा मंदिर जिसकी जमीनों को बचाने राजनीतिक दल,व 36 कॉम लामबंद
सिरोही (हरीश दवे सिरोही)।

गत महिनो से जिला मुख्यालय पर रामझरोखा प्रन्यास की संपत्ति लीज व विक्रय को लेकर कांग्रेस पार्टी के साथ पूर्व विधायक संयम लोढा ने इसे जन भावनाओं का मुद्दा बना दिया है। जिसकी चपेट में जिला प्रशासन नगर परिषद व पूर्व विधायक राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व उनके पुत्र को घेरे में ले चुके है और भाजपा का प्रवासी नेता प्रवासी प्रकोष्ठ से पद मुक्त होने के बाद भी अनवरत रूप से सोशल मीडिया में विडियो जारी कर राज्यमंत्री की बदनामी कर रहा है। और इसको लेकर गत 17 दिसम्बर को जांच रिपोर्ट आ गई है। लेकिन कार्यवाही सिफर है तथा संभवतया पट्टो आवेदनो की मूल पत्रावली भी नगर परिषद कार्यालय में नदारद है।
रामझरोखा मंदिर के मसले पर हंगामे के बाद गठित जांच कमेटी के राजस्व अधिकारी भंवरसिंह, सहायक अभियंता पंकज कुमार गुर्जर व राजस्व निरीक्षक सुशील कुमार पुरोहित ने जरिये भूमि शाखा लिपिक आरआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑनलाईन पट्टो की जांच के बाद बताया कि इसकी ऑफलाईन प्रक्रिया संधारित नही की गई तथा ऑनलाईन आवेदन क्रमांक 230610 दिनंाक 18.08.2025 को आवेदक राजगुरू महंत सीतारामदास चेला जयरामदास द्वारा आवेदित फाईल का पृथक रिकॉर्ड पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार दिया जिसके अनुसार पुराना खसरा नम्बर 2094 और नया खसरा नम्बर 2711 में नगर पालिका के द्वारा जारी किए 8 पट्टो निरस्ती के आदेश दे दिया हैं। कलेक्टर ने जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पट्टों निलंबन के आदेश दिए हैं उन्होंने उसी जांच रिपोर्ट में आई अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की। जबकि जिला कलेक्टर खुद सिरोही नगर परिषद की प्रशासक हैं और ये झोलझाल उनके प्रशासक काल में ही हुआ है। तीन सदस्यीय जांच रिपोर्ट में एक महत्वपूर्व टिप्पणी की गई है, जिसके अनुसार रामझरोखा के 69 ए के पट्टों की ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स तो है लेकिन फिजिकल पत्रावली नहीं है। फाइल गायब है तो संबंधित सेक्शन एफआईआर और फाइल जमा किए बिना पट्टा निकाला गया तो निलंबन क्यों नहीं किया गया? जबकि खुद जिला कलेक्टर नगर परिषद की प्रशासक हैं। ये पूरी पत्रावली उनके प्रशासक काल में ही चली तो लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
ऑनलाइन पत्रावली करनी भी जरूरी
सिरोही नगर परिषद में बोर्ड का कार्यकाल नवम्बर 2024 में ही खत्म हो गया था। राज्य सरकार ने सिरोही कलेक्टर को यहां का प्रशासक तभी नियुक्त कर दिया था। दस्तावेज बता रहे हैं कि रामझरोखयकी कथित जमीन के पट्टों की पत्रावली जुलाई 2025 से चली है। तब तक पट्टों पत्रावलियां ऑनलाइन चढ़नी शुरू हुई थी। पत्रावलियों की फिजिकल कॉपी भी नगर पालिका जमा करनी होती है। सारी रिपोर्ट्स नोटशीट इसी फिजिकल या ऑफलाइन फाइल होती है। इसके बाद ही पत्रावली को आगे बढ़ाते हुए इसके स्टेट्स को ऑनलाइन अपडेट किया जाता है। रामझरोखे की पत्रावली की यदि ऑफलाइन जांच समिति को नहीं मिली इसके दिन ही कारण हो सकते हैं।
वो ये कि सिरोही नगर परिषद नेने इसकी ऑफलाइन पत्रावली जमा ही नहीं की और बिना इंस्पेक्शन और नोटशीट के ही पत्रावली आगे बढ़ा दी। या इन पट्टों की भी ऑफलाइन पत्रावली नगर परिषद में जमा हुई थी, उसमें नोटिंग भी हुई थी लेकिन इस मामले में हुए गड़बड़ झाले से बचने के लिए स्कैम खुलते ही पत्रावली गायब कर दी गई। जिला कलेक्टर खुद ही नगर परिषद की प्रशासक हैं ऐसे में ऑफलाइन पत्रावली जमा नहीं करके पट्टा जारी करने वाले कार्मिकों को निलंबित किया जाना चाहिए या और यदि ऑफलाइन पत्रावली गायब की गई है तो संबंधित सेक्शन जिम्मेदार खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जानी चाहिए थी। लेकिन, अभी तक इस तरह की किसी कार्रवाई की सूचना नहीं आई है।
बिना शपथ-पत्र व बंध-पत्र जारी किए पट्टे
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि 69 ए के पट्टे जारी करने के लिए आवेदक का शपथ पर और बंध पत्र लगता है। जांच के दौरान पाया गया कि ये दोनों ही दस्तावेज नहीं लिए गए। इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट में आवेदक के नाम की आपत्ति सूचना प्रक्रिया रिकॉर्ड में नहीं पाया गया। ऑफलाइन फाइल में 69 ए के पट्टों के लिए भूखंड की तकनीकी रिपोर्ट नहीं पाई गई। अब आने वाला समय बतायेगा की सिरोही नगर परिषद में भ्रष्टाचार व नियमो के विपरित बने पट्टो पर भारतीय जनता पार्टी क्या रूख अख्तियार करती है जबकि कांग्रेस में रामझरोखा मंदिर सम्पत्ति बिक्री व लीज प्रकरण को जनभावनाओ का मुद्दा बना दिया है। यह अलग बात है कि धार्मिक आयोजनो में कल पूर्व विधायक संयम लोढा व राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व लुम्बाराम चौधरी एक ही मंच पर आसीन हुए और राजनीतिक तल्ख्यिा नही दिखी लेकिन रामझरोखा मंदिर प्रकरण में सर्द हुए सियासी मौसम में राजनीतिक पारा हाई डिग्री का राजनीतिक तापमान जिले में फैला चुका है।
क्या कहते है आयुक्त आचार्य - रामझरोखा मंदिर के आठ विवादित पट्टो के संदर्भ में आयुक्त आशुतोष आचार्य व तहसीलदार जगदीश विश्नोई से इस बाबत् पूछे जाने पर उन्होने बताया कि रामझरोखा प्रन्यास की भूमि पर 69ए में बने पट्टो की जाँच के बाद कमेटी द्वारा रिपोर्ट मिलने के बाद जिला कलेक्टर महोदय को रिपोर्ट सौप दी हैं तथा 69ए में गलत एवं विधिक प्रक्रिया के विरूद्ध जारी 8 पट्टो को लेकर 07 दिवस का नोटिस दिया गया है और उसके बाद पट्टा निरस्तगी की कार्यवाही होगी।

संपादक भावेश आर्य



