रेलवे जंक्शन विवाद: पिण्डवाड़ा में ही जंक्शन की मांग को लेकर निकाली विशाल वाहन रैली, सांसद का विरोध तेज, रेल मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पंचायती राज चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
पिंडवाड़ा से सिरोही तक वाहन रैली
2016–17 में हुए सर्वे का हवाला, स्वरूपगंज शिफ्ट करने के आरोप
सिरोही(हरीश दवे)।

सिरोही जिले में रेलवे जंक्शन को लेकर चल रहा विवाद शनिवार को एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। पिण्डवाड़ा में ही रेलवे जंक्शन बनाने की मांग को लेकर पिण्डवाड़ा क्षेत्रवासियों ने विशाल वाहन रैली निकाली। यह रैली पिण्डवाड़ा से शुरू होकर सिरोही शहर में प्रवेश करते हुए सिटी क्षेत्र, मुख्य बाजारों से गुजरती हुई जिला कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली में बाइक, कार, टैक्सी, टेम्पो सहित सैकड़ों वाहन शामिल रहे, वहीं बड़ी संख्या में आमजन का हुजूम उमड़ पड़ा।
रैली के दौरान क्षेत्रवासियों ने एक स्वर में पिण्डवाड़ा में ही रेलवे जंक्शन बनाए जाने की मांग दोहराई। लोगों का कहना है कि वर्ष 2016–17 में रेलवे जंक्शन को लेकर सर्वे पिण्डवाड़ा नगर के लिए ही किया गया था, इसके बावजूद अब राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली लोगों के इशारे पर जंक्शन को स्वरूपगंज शिफ्ट करने की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी
रैली के दौरान जालौर-सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने सांसद पर स्वरूपगंज के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाते हुए “हाय-हाय” के नारे लगाए। लोगों का कहना था कि जनभावनाओं के विपरीत जाकर यदि निर्णय थोपने का प्रयास किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
रैली के जिला कलेक्ट्रेट पहुंचने पर रेल मंत्री के नाम जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई कि रेलवे जंक्शन पिण्डवाड़ा नगर में ही बनाया जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिण्डवाड़ा भौगोलिक, सामाजिक और व्यावसायिक दृष्टि से जंक्शन के लिए अधिक उपयुक्त है, साथ ही यहां पहले से हुए सर्वे को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।
भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
ज्ञापन सौंपने के दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने भाजपा नेताओं पर जमकर निशाना साधा। वक्ताओं ने कहा कि जनता की भावनाओं का अनादर किया जा रहा है और जनहित के बजाय “धनाढ्य सेठों” और प्रभावशाली लोगों के इशारों पर फैसले लिए जा रहे हैं। नेताओं पर तानाशाही रवैया अपनाने और सत्ता के नशे में आमजन की आवाज को दबाने के आरोप लगाए गए।
कमलेश मेटाकास्ट खनन परियोजना का मुद्दा भी उठा
सभा के दौरान कमलेश मेटाकास्ट प्रस्तावित खनन परियोजना का मुद्दा भी जोरशोर से उठा। वक्ताओं ने कहा कि पिण्डवाड़ा क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतें पिछले करीब तीन महीनों से जल, जमीन और जंगल की रक्षा को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। नेताओं पर आरोप लगाया गया कि वे AC कार्यालयों में बैठकर आराम फरमा रहे हैं और गांवों की समस्याओं से आंखें मूंदे हुए हैं।
वक्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आगामी पंचायती राज चुनावों में ऐसे नेताओं को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा और उनका बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि रेलवे जंक्शन को स्वरूपगंज शिफ्ट करने के पीछे कमलेश मेटाकास्ट जैसी खनन परियोजनाओं से माल ढुलाई की मंशा है, ताकि रेलवे के माध्यम से खनन सामग्री की सप्लाई आसानी से की जा सके।
एकजुटता का प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने एक राय होकर पिण्डवाड़ा में ही रेलवे जंक्शन बनाने की मांग रखी और स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की आवाज है। वक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों को अनसुना किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रैली और प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा। रैली के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें नजर आईं। पुलिस प्रशासन ने यातायात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए।
कुल मिलाकर, पिण्डवाड़ा में रेलवे जंक्शन की मांग को लेकर निकली यह विशाल वाहन रैली न केवल जनआक्रोश का प्रतीक बनी, बल्कि यह संकेत भी दे गई कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी हुई तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज हो सकता है।


संपादक भावेश आर्य



