यह संघ के शताब्दी वर्ष के साथ संपूर्ण हिंदू समाज का शताब्दी वर्ष है।

चंद्रमा के चांदनी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निकला कोमुदी पथ संचलन
सिरोही(हरीश दवे) ।

विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश से 6 दिन पूर्व शहर में शनिवार की रात्रि में मशाल के साथ भव्य कोमुदी पथ संचलन का आयोजन किया गया। संचलन में पहली बार घोष पथक एवं परम पवित्र भगवा ध्वज पर आकर्षक लाईट लगाई गयी थी जो अधेरे में अपनी अलग छटा बिखर रही थी। कार्यक्रम का शुभारंभ हाउसिंग बोर्ड स्कूल के पास स्थित वीर बाला कालीबाई उद्यान से हुआ। इस पथ संचलन के साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के उत्सव का शुभारम्भ शुरू हो गया।
नगर की सज्जन शक्ति एवं स्वंयसेवको की उपस्थिति में घोष वंदना और प्रार्थना के बाद संचलन की शुरुआत की गई। पारंपरिक संघ गणवेश में स्वयंसेवक घोष की गूंज के साथ अनुशासित पंक्तियों में दंड लिए आगे बढ़ रहे थे, जबकि उनके पीछे स्वयंसेवक हाथों में प्रज्वलित मशालें लेकर चल रहे थे। आनक, प्रणव,शंख की धुनों के साथ कदम ताल मिलाते अनुशासन के साथ पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन में भाग लिया.। पथ संचलन के इस समागम पर शहरवासियों ने जगह जगह स्वयंसेवकों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया. लोगों ने पथ संचलन में अनुशासन और एकात्मभाव का संदेश देने वाले स्वयंसेवकों का उत्साह बढ़ाया. इस संचलन में सभी आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया.।
पथ संचलन में जिला प्रचारक योगेश जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉक्टर हेडगेवार जी ने जब संघ की स्थापना की तब क्या करना है तय नहीं था बस हिंदू समाज का संगठन खड़ा करना है ऐसा भाव मन में करके वे समाज को जगाने निकल पड़े। डॉक्टर हेडगेवार जी ने संघ को जो रीति नीति और पद्धति देकर गए इस पद्धति के साथ हम 100 वर्ष तक चले 1925 से 2025 तक की इस यात्रा में कई पड़ाव आए आज जब संघ 100 वर्ष का हो रहा है तब पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है संघ शताब्दी वर्ष में क्या करने वाला है इस पर सब विचार कर रहे हैं। उन्होने कहा कि 100 वर्ष की इस यात्रा में हम हमारे अनेक कार्यकर्ताओं व प्रचारकों एवं समाज की सज्जन शक्ति के अथक परिश्रम और संघर्ष के बाद आज इस स्थान पर पहुंचे हैं विश्व में सबसे बड़े हिंदू संगठन बनकर हम उभरे हैं ।
उन्होने कहा कि 1948, 1975 मैं हम किस परिस्थिति से गुजरे हैं वह दौर भी समाज ने देखा है। उन्होंने कहा कि संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेयहोसबोले ने अपने उद्बोधन में एक बार कहा था कि संघ को 200 वर्ष होने की आवश्यकता नहीं है जब यह समाज संगठित हो जाएगा जब यह समाज सक्रिय हो जाएगा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए समाज खुद खड़ा हो जाएगा तब संघ की आवश्यकता नहीं पड़ेगी इसलिए समाज को संगठित करने के लिए जागृत करने के लिए इस कोमुदी पथ संचलन के माध्यम से आने वाली विजयादशमी के अवसर पर हिंदू समाज इसका भागीदार बने । उन्होंने कहा कि यह संघ का शताब्दी वर्ष नहीं है वरन पूरे संपूर्ण हिंदू समाज का शताब्दी वर्ष है । उन्होंने आह्मन किया कि सर्व हिंदू समाज 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर के मध्य शहर की आठ बस्ती में होने वाले विजयादशमी उत्सव में पूर्ण गणवेश के साथ इसर्मे।भागीदार बने। इन उत्सवों में माताएं बहने भी जरूर शामिल होकर संघ का दर्शन करे ओर अपनी अहम भूमिका निभायें।
रात्रि में 8.30 बजे चन्द्रमा की रोशनी में निकला कोमुदी पथ संचलन नगर के हाउसिंग बोर्ड,पी.डब्ल्यू डी कॉलोनी,अहिंसा सर्कल,कॉलेज रोड,कृष्णापुरी,भरत मेटल,एन.सी.सी चौराहा से घांचीवाड़ा,राठौड लाईन,सरजावाव दरवाजे से होते हुए बस स्टेण्डरोड,डॉ.संपूर्णानंद कॉलोनी से भाटकड़ा बस्ती से होकर रामझरोखा मेदान में पहुच कर संपन्न हुआ करीब तीन किलोमीटर वाले इस मार्ग पर पथ संचलन को देखने एवं स्वयसेवको का उत्साह वर्धन करने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित थे।


संपादक भावेश आर्य



