झाड़ोली, झांकर नदी में धड़ल्ले से जारी है बजरी माफियाओ का अवैध खनन, नदी बनी डम्पिंग यार्ड

अधिकारियो की कमी या खनन विभाग की मिलीभगत तो नहीं जिससे दिनों दिन माफियां हो रहें बेखौफ
झाडोली ग्रामवासीयों की ग्राम पंचायत से मांग वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में हो नदी का उद्धार
सिरोही 8 जून (हरीश दवे)-।

प्रदेश में राजस्थान सरकार वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का आगाज 5 जून से हो गया है लेकिन जिले में अभियान की शुरूआत के बाद जैसे यह अभियान मंथर हो गया है और जिले के प्राकृतिक संसाधन और डम्पिंग यार्ड बनी नदियों में अवैध उत्खनन भी जारी है तथा नदिया कचरा व कुडा डालने से कचरे के अम्बार से अटी पडी है। झाडोली नदी की ऐसी दुर्दशा देख झाडोली के ग्रामवासियों व जिला जल बिरादरी ने आबू पिण्डवाडा के विधायक समाराम गरासिया व पंचायत प्रशासक कैलाश सुथार को ज्ञापन देकर नदी में अवैध खनन तथा नदी की साफ सफाई करवा नदी किनारे रिवर फ्रंट बनाने की मांग की।
ज्ञापन में जिला जल बिरादरी के सचिव हरीश दवे व ग्रामीणो ने क्षैत्रीय विधायक समाराम गरासिया को लिखे पत्र में कहा कि झाडोली नदी त्रंयम्बकेश्वर महादेव से लेकर हिन्दू श्मशान घाट तक डम्पिंग यार्ड बन चुकी है जिसमें ठेकेदार पूरे गांव व आसपास का मलबा डालते है वहीं रेती के अवैध उत्खनन का कारोबार चरम पर है जिससे पर्यावरण को गहरा खतरा हो गया है तथा नदी भी अतिक्रमणो की चपेट में है। ब्रह्मपुरी व समीप की बस्तियों नदी किनारे का भाग पूरा गदंगी व कचरे से अटा पडा है जिससे नदी का स्वरूप विकृत हो रहा है तथा आमजन की धार्मिक भावनाओ का हनन हो रहा है। अगर विधायक समाराम गरासिया राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप इस नदी के कायाकल्प का बीडा उठावे और ग्राम पंचायत यहां पर कचरा डम्प करने से रोकने के साथ नदी सौन्दर्यकरण पर्यटन व धार्मिक आस्थाओं को महत्व देते हुए घाट का निर्माण करे तो ग्रामवासियों के लिये एक सुन्दर पर्यटन स्थल विकसित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील क्षेत्र के झाड़ोली नदी में अवैध बजरी खनन का खेल बदस्तूर जारी है। बजरी के अवैध खनन पर कोर्ट की रोक होने के बावजूद भी झाड़ोली में कोर्ट के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रहीं। माफियां दिन रात बजरी का अवैध खनन कर रहें है। परन्तु जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत करवाने के बाद भी संबंधित विभाग अवैध खनन पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुआ है। काईवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होने से बजरी के अवैध माफियाओं के हौसले सातवें आसमान में है। वही जिम्मेदारों की उदासीनता माने या आपसी सांठगांठ जब भी काईवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुँचते है, उससे पूर्व ही माफियां मौके से भाग निकलते हैं, अधिकारियों के चले जाने के बाद पुनः खनन धड़ल्ले से शुरू हो जाता है, जिससे जिम्मेदारों की कार्यशैली को लेकर तमाम सवाल उठना भी लाजिमी है। सवाल यह उठता की आखिर माफियाओ को राजकीय कार्रवाई की भनक कैसे लग रही है? और वो कौन है जो राजकीय काईवाई की गोपनीयता भंग कर माफियाओं के साथ मिलीभगत करके उन्हें श्रेय दे रहें है, यह भी जांच का अहम बिंदु है। प्रशासनिक अधिकारी विषय को लेकर क्यों गम्भीर नही दिख रहें। ऐसे में ग्रामीणों में रोष बढ़ना भी वाजिब है।
बजरी के अवैध खनन से ग्रामीण परेशान जिम्मेदार बेखबर-
ग्रामीणों ने बताया कि बजरी से भरे अनेको बगैर नम्बर प्लेट के ट्रैक्टर ट्रॉली रोजाना धड़ल्ले से दिन रात बजरी ले जा रहे हैं। साथ ही उनके चालक तेज रफ्तार से गांव के बीच से अपने वाहन निकाल रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार तेज रफ्तार से ट्रेक्टर दौड़ाने वाले चालकों को ग्रामीणों की ओर से मना किया गया तो वह गाली-गलोच कर मारपीट पर उतारु हो जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि बजरी के अवैध खनन व अवैध व्यापार में लिप्त लोगों पर कार्यवाही कर ट्रेक्टर-ट्रॉलियां जब्त की जाए। विदित रहे झाड़ोली नदी क्षेत्र में बजरी का अवैध कारोबार कई बार सुर्खियों में रहा हैं।
क्या कहते है अधिकारी-
खनिज विभाग के खनि अभियन्ता श्री चन्दन ने कृष्णावती नदी व झाडोली व अन्य नदियों में रैती के अवैध खनन बाबत पूछने पर उन्होने कहा कि कृष्णावती नदी का मसला तो जिला प्रशासन देख रहा है जिसकी बुधवार मिटिंग है तथा झाडोली व अन्य नदियों में अवैध खनन की शिकायत मिलने पर विभाग कार्यवाही करता है और जुर्माना किया जाता है।
वही प्रशाशक ग्राम पंचायत केलाश सुथार का कहना है की ग्राम पंचायत नदी को साफ सुथरा बनाना चाहती है जिसमे आम जन को भी सक्रियता दिखा कर नदी को पवित्र बनाने में सहभागी बनना होगा और नदी में कचरा व मलबा डालने पर बाज आना होगा।
उन्होंने नदी के अवैध उत्खनन पर चिंता जाहिर करते हुए इसे खनन विभाग व पँचायत का मामला बनाया।
पर झडोली नदी के सौंदर्यीकरण व रिवर फ्रंट बनाने के मुद्दे पर इसे जल सरंक्षण का अभियान बनाने की मंशा जाहिर की।


संपादक भावेश आर्य



