जिला प्रशासन, सांसद, राज्यमंत्री बेखबर,मुख्यालय की जनता बेसहारा भटकते नंदीयों व गोवंश की समस्या से ग्रस्त

सिरोही 17 मई (हरीश दवे)।

भीषण गर्मी में इन्सान तो क्या पशु पक्षी भी गर्मी के ताप को झेल रहे है। वहीं शहर में अर्बुदा गौशाला, नन्दी गौशाला, पीएफए जैसे अनेक आश्रय स्थल हैं लेकिन पॉलिथिन खाकर शहर में अधमरा होकर भटक रहा भुखा प्यासा गोवंश भटक रहा है तो प्यास से व्याकुल नंदी भड़ककर आमजन पर भी हमलावर हो रहे हैं इस सूरत मंे जहां आमजन एक तरफ घायल हो रहा हैं वहीं दूसरी तरफ गोवंश भी क्रूरता का शिकार हो रहा है। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन व नगर परिषद् प्रशासन को बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान में कोई दिलचस्पी नहीं है और बेकाबु नंदी जो आपस मंे भीड़कर सडकों पर आमजन को घायल करते है या खड्डे में गिरते है। जब बडी मुश्किल से सफाई कर्मी जान जोखिम में डाल बिना संसाधनों के उन्हें पकडते हैं तो 2000 बीघा एमओयू वाली नंदी गोशाला हो या पीएफए ऐसे पशुओं को अपनाने से इंकार करती हैं और सफाई कर्मी उन्हें दूर दराज भले छोडकर आवे लेकिन बेसहारा पशु आश्रय के अभाव में भटकने को मजबूर है। जबकि राज्य सरकार करोडो रूपये गोवंश संरक्षण व अनुदान के नाम पर बांट रही है। जिसका दुरूपयोग होने से जिला मुख्यालय पर बेसहारा पशुओं की समस्या से हाईवे हो या वार्ड मोहल्ला सर्वत्र आमजन नगर परिषद् व नंदी गोशाला तथा विभिन्न गोशालाओं द्वारा नर गोवंश को जिला मुख्यालय पर छोड़ने से यह भयावह हालात उत्पन्न हुए है। शहर वासियों की एक ही दरकार है जिला प्रशासन हालात को जानते हुए भी कार्यवाही क्यों नहीं करता।

गौरतलब है कि पूर्व में सिरोही नगर परिषद् द्वारा कांजी हाऊस को जरिये निलामी बेच दिया है तथा पूर्व राजमाता व सिरोही के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. गोकुलभाई भट्ट द्वारा स्थापित अर्बुदा गोशाला एवं डेयरी फार्म की 5000 बीघा खातेदारी भूमि अतिक्रमणों की चपेट में है व डेयरी फार्म को विगत दशकों में खुर्द बुर्द कर दिया है तथा एक दशक पहले मीडिया में लगातार समाचार बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर चकने पर तत्कालीन जिला कलेक्टर वी. श्रवण कुमार व एसडीएम ओपी विश्नोई ने जिला कलेक्टर के अधिकार क्षैत्र वाली अर्बुदा गोशाला सिरोही नगर परिषद् के हवाले कर बेसहारा पशुओ को संरक्षण देने की निति अमल में आई लेकिन भ्रष्टाचार की शिकार अर्बुदा गोशाला व उसकी सलाहकार समिति जिला मुख्यालय पर गोवंश को संरक्षण नही दे सकी तथा गत कांग्रेस सरकार ने एक निजी गोशाला को नंदी गोशाला के लिए 2000 बीघा भूमि का आवंटन कर दिया तथा अर्बुदा गोशाला कागजो में रह गई तथा गो अभ्यारण्य का ढिंढोरा पिटते हुए गोशाला के विकास का कार्य भले राज्य सरकार की सहायता व अनुदान से चलता हो लेकिन राजनैतिक संरक्षण के चलते शहर में भटकते गोवंश व नंदीयों को अर्बुदा गोशाला व नंदी गोशाला में आश्रय नहीं मिलता।

आज माली समाज छात्रावास रोड़ पर एक भटकते नंदी के आतंक में करीब 7 व्यक्ति चोटिल हुए व एक जन लहुलुहान हुआ व एक अन्य स्थान पर दो भटकते नंदी आपस में भिडने से एक नंदी नाले में गिर गया जिसकी सूचना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर परिषद् के एसआई प्रवीण माली व महिपाल सिंह चारण सफाई कर्मीयों के साथ रस्सा व लकडी लेकर पहुँचे और जान जोखिम में डाल दोनो स्थानों पर कडी मशक्कत के बाद नंदी पर काबु पाया और जेसीबी से नंदी को बाहर निकाला। सफाई कर्मी जब नंदी गोशाला में नंदी को सौपने गये तो निजी गोशाला ने नंदी को लेने से इन्कार किया और कहा कि इसे पीएफए मे भेजो। पीएफए हालांकि छोटी जगह है और घायल पशुओं को संरक्षण देती है। लेकिन सरकारी भूमि नंदी गोशाला के लिए एमओयू होने के बाद नंदीयांे व गोवंश को सिरोही सडको पर भटकने के लिए छोडने के पीछे क्या तुक है।
इस बाबत् जिला मुख्यालय के जागरूक नागरिक व समाज सेवी आये दिन जिला कलेक्टर, एडीएम, राज्यमंत्री, सांसद, आयुक्त को बेसहारा गोवंश व पशुओं की समस्या के समाधान के लिए शिकायते करते रहते है। लेकिन जिला मुख्यालय की जनता जो इस भयावह समस्या को झेल रही है जिसके निदान में किसी को कोई दिलचस्पी नहीं है। जिले में अनेक गोशालाएंे अच्छा कार्य कर रही है जहां गोवंश का संरक्षण हो रहा है जबकि अनेक गोशालाऐ अनियमितता व अतिक्रमण की शिकार है जिनके खिलाफ राजनैतिक संरक्षण में पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन व नगर परिषद् प्रशासन कार्यवाही करने से कतराता है।


संपादक भावेश आर्य



