सरूपविलास परिसर में ही उड़ती यातायात पार्किंग की धज्जियां,जिला मुख्यालय पर कैसे हो सुधार,

सिरोही(हरीश दवे)।

सिरोही जिले में सड़क दुर्घटनाओं में इजाफे का कारण नेशनल हाइवे पर क्षमता से ज्यादा सवारियां ढोने शहरी व ग्रामीण क्षेत्रो में सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थानों पर अवैध पार्किंग अहम वजह है।जिसके निदान में न जिला प्रशाषन, यातायात पुलिस व शहरी व ग्रामीण निकायों ने भी आंख मूंद रखी है।जिसमे जिला मुख्यालय पर अवैध पार्किंग की समस्या के निदान में न तो किसी सांसद न विधायक,सभापती व जन प्रतिनिधियों ने दिलचस्पी ली।जिसका परिणाम है की जिला मुख्यालय के प्रमुख मार्ग,चौराहे,सड़क अवेद्ध पार्किंग व आवारा पशुओं से आम नागरिकों के जान व माल का सबब बने है वही जिला ,पुलिस प्रशाषन व न्यायालय परिसर की लचर यातायात पार्किंग व्यवस्था का खामियाजा मुवक्किल, आमजन व अधिवक्ता भी भुगतने को मजबुर है।। जिला मुख्यालय का सरूपविलास परिसर जिसमे जिले के प्रशाशनिक, पुलिस व न्यायिक अधिकारियों के दफ्तर है जहां पूरे जिले की जनता अपने सरकारी कार्यो से सरूपविलास आती है पर वहां के हालात जो दर्शाते हैं व स्तिथिया बनी है उसका खामियाजा जिले की जनता को भुगतना पड़ता है।। ऐसा नही की सरूपविलास परिसर में स्थान की कमी है लेकिन जिला प्रशाषन ने कभी सरूपविलास परिसर में यातायात पार्किंग की व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध नही किये व यातायात पुलिस वहां बेबसी से तैनात है।पूरे परिसर में यंत्र तँत्र सर्वत्र आढ़े तिरछे वाहन,कार, बाइक खड़े है।हालात तब विकट हो जाते है जब चुनाव शाखा से तहसील ऑफिस के पास बंदी गृह के लिए पेशियों पे पुलिस बंदियों को लाती है वहां कार पार्किंग से बन्द रास्ते मे बहुत परेशानी होती है। सरूपविलास परिसर के दो केंटिनो में मिलने वाली चाय व नाश्ते पानी आम जन के स्वास्थ्य के लिए भी घातक है जो स्वास्थ्य पैमाने पे खरे नही उतरते।वही सरूपविलास परिसर में न तो आम जनता के पीने के पानी की सुविधा है न बैठने की पर्याप्त व्यवस्था व सरूपविलास परिसर के जन सुविधा के बने शौचालय व मूत्रालयों की स्तिथि तो यह है जिसमे न पुरुष व महिलाओं को होने वाली दिक्कतों पर किसी को ध्यान नही है जो स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां सरूपविलास परिसर में उठाते है।ज़ब जिला मुख्यालय के अहम स्थान के यह हालात है जहां प्रशाशनिक फैसले होते है।जिला यातायात सलाहकार समिति के निर्देश भी यहाँ जारी होते है।पर जिले भर में यातायात व पार्किंग व्यवस्था की बदहाली के सुधार में शायद हालात कभी नही सुधरेंगे।



संपादक भावेश आर्य



