इंदिरागांधी के साहसिक नेतृत्व और सरदार पटेल की राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका- *संयम लोढ़ा *

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सिरोही(हरीश दवे)।

मुख्य अतिथि संयम लोढ़ा ने अपने संबोधन में श्रीमती इंदिरा गांधी एवं सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद कर नमन करते हुए कहा कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को उनके जीवन को पढ़ना चाहिये जिससे हमे पता चल सके की उनका जीवन देश के लिए कैसे काम आया और उनकी प्रेरणा से हम देश को क्या दे सकते है । लोढ़ा ने कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं।बचपन में उन्होंने ‘बाल चरखा संघ’ की स्थापना की और असहयोग आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी की सहायता के लिए 1930 में बच्चों के सहयोग से ‘वानर सेना’ का निर्माण किया। सितम्बर 1942 में उन्हें जेल में डाल दिया गया। 1947 में इन्होंने गाँधी जी के मार्गदर्शन में दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया।भारतीय राजनीति की ऐसी सशक्त नेता थीं, जिन्होंने अपने दृढ़ संकल्प, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से विश्व राजनीति में भारत को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनके निर्णायक नेतृत्व के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ, जिसने उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स की समाप्ति, हरित क्रांति को प्रोत्साहन तथा देश के गरीब, किसान और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए उठाए गए कदम उनके महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए कभी समझौता नहीं किया तथा देशहित में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा।

सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता, संगठन शक्ति और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे।
उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती प्रदान की। खेड़ा और बारडोली के किसान आंदोलनों के माध्यम से किसानों की आवाज बुलंद की और आजादी के बाद देश की सैकड़ों रियासतों का एकीकरण कर भारत के मजबूत राष्ट्र निर्माण की नींव रखी।सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि सरदार पटेल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान सेनानी और स्वतंत्र भारत के सच्चे शिल्पकार थे। उन्होंने अपनी अद्भुत राजनीतिक सूझबूझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और संगठन क्षमता के बल पर देश की 562 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत की नींव मजबूत की। स्वतंत्रता के बाद देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। लोढ़ा ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और राष्ट्र के प्रति समर्पण से असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव किए जा सकते हैं। आज देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाए रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री एवं आयरन लेडी श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि तथा भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को शिवगंज स्थित कांग्रेस कार्यालय में पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार माननीय संयम लोढ़ा के मुख्य आतिथ्य में श्रदा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में बोलते हुये नगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. हनवंत सिंह मेड़तिया ने कहा कि इंदिरा गांधी का साहसिक नेतृत्व और सरदार पटेल की राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने की दूरदर्शिता भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

जिला महासचिव कुशल सिंह देवड़ा
पूर्व यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश मीणा ,नगर कांग्रेस प्रवक्ता सुमित परमार ने भी विचार प्रकट किए ।

कार्यक्रम में नगर कमेटी उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम मिन्हास, उपाध्यक्ष व पार्षद जगवीर सिंह गोहिल, राजेश सोनी,राजकुमार,दिनेश छिपा,फूला राम सुथार,बनवारी लाल अग्रवाल,राम लाल,एनएसयूआई ज़िलाध्यक्ष चम्पा लाल तिरगर,राहुल चावरिया, नईम खान, भूरा राम माधव,राजेंद्र माली, दिनेश कुमार, अशोक,जयंती लाल,हुसैन छिपा आदि मौजूद रहे ।

संपादक भावेश आर्य