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कोमल के दीक्षा का वरघोडा आज, कल होगी दीक्षा

सिरोही(हरीश दवे) ।

चार्टेड एकाउन्टेड कोमल के दीक्षा का भव्य वरघोड़ा भटाना में मंगलवार को प्रातः 8.30 बजे आचार्य भगवंत रविरत्नसूरीजी महाराजा की निश्रा में निकलेगा। वरघोड़े के बाद 10.30 बजे प्रीतिदान होगा। उनका सांसारिक वायणा यानि सांसारिक जीवन में भोजन ग्रहण कार्यक्रम दोपहर 3.30 बजे होगा। रात 8 बजे उनका सांसारिक अलविदा यानि संयम के लिए विदाई समारोह होगा। इस विदाई समारोह में सुरत के संगीतकार मनन संघवी एवं संवेदना मुबई के स्मित कोठारी अपनी प्रस्तुतियां देकर भक्ति रचायेंगे।
जैन संघ भटाना के अध्यक्ष पुखराज भबुतमलजी परमार एवं सचिव इंदरमल हंसाजी ने बताया कि बुधवार को सुबह मंगल मुहूर्त में दीक्षा विधि प्रारम्भ होगी। आज कोमल के ननिहाल पक्ष मैलापचंद मगनलाल जी सोंलकी परिवार रेवदर की ओर से मामा नरेश कुमार एवं कल्पेश कुमार सोलंकी नाचते गाते हुऐ मामेरा लेकर आये तो माहौल खुशनुमा एवं भक्तिमय हो गया और मामियों ने गीत गाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। ननिहाल पक्ष के लोगों ने कोमल को खूब लाड़ लडाया और दीक्षार्थी अमर रहो कहकर दीक्षार्थी का जय जयकार करते हुऐ उन्हे शुभकामनाएं दी।

दीक्षा महोत्सव पर हुआ गुरु भगवंतों का सामैया

भटाना नगर में मुमुक्षु कोमल कुमारी पुखराजजी परमार की दीक्षा का त्रिदिवसीय महोत्सव का मंगल प्रारंभ हुआ, प्रथम दिन सूरीमंत्र समाराधक आबुगौडरत्न आचार्य श्री रविरत्नसूरीश्वरजी म.सा., आचार्य श्री जयेशरत्नसूरीश्वरजी म.सा., पंन्यास प्रवर श्री वैराग्यरत्नविजयजी म.सा. आदि अनेक साधु-साध्वी भगवंतों का बाजे-गाजे के साथ सामैया सह मंगल प्रवेश हुआ। मुमुक्षु कोमल कुमारी ने सिर पर कलश धारण करके आचार्य श्री को तीन प्रदक्षिणा देकर सुकुन दिया। अक्षतो से वधामणा किया गया। जैन धर्म में साधु साध्वीजी का अभिनंदन उन पर चावल उछालकर करने की प्राचीन परम्परा हे । तत्पश्चात मंदिरजी के दर्शन कर दीक्षा मंडप में धर्मसभा हुई। वहाँ इसी परिवार से 25 वर्ष पहले दीक्षित कुल-दीपिका साध्वीजी धर्मांगरेखाश्रीजी म.सा. के वर्धमान तप की 100 वीं आयंबिल ओली तप की पूर्णाहुति पर चर्तुविद संघ ने साध्वीजी पर अक्षत उछालकर वधामणें कियें।
पूज्य आचार्यश्री ने बताया कि यह वर्धमान तप यानि एक-एक करते आयंबिल बढ़ाते जाना, चोदह वर्ष में 50-50 आयंबिल करने पर यह तप पूर्ण होता है। ऐसा कठिन तप इस छोटी सी उम्र में साध्वीश्री धर्मांगरेखाश्रीजी म.सा ने करके कमाल किया। आयंबिल यानि दिन में ही एक बार लुक्खा भोजन एवं उकाला हुआ पानी पीना। फिर मुमुक्षु कोमल बेन ने विविध औषधियों द्वारा भगवान आदिनाथ का शक्रस्तव अभिषेक किया। दोपहर में मामा परिवार द्वारा मुमुक्षु का मामेरा किया गया, मुमुक्षु के वस्त्र रंगने का कार्यक्रम, रात्रि में बंदोली निकाली गई।

संपादक भावेश आर्य

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