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विधायक जन सुनवाई केंद्र, सिरोही में नारी शक्तिवंदन अधिनियम पर संगोष्ठी — महिलाओं के अधिकार और भागी दारी पर जोर

शिरोही(हरीश दवे)।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक अवसर, अधिकार और बदलाव का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक विषय पर आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिला शक्ति जिसमें महिला अधिवक्ता, एनजीओ संचालक, जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त होकर राष्ट्र निर्माण में सहभागिता निभाने वाली जागरूक महिलाओं की संगोष्ठी विधायक जन सुनवाई केंद्र, सिरोही पर आयोजित हुई, जिसमें
इस संगोष्ठी का सफल आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य वीरेन्द्र सिंह चौहान एवं जयेश कुमार सोलंकी के मार्गदर्शन एवं विशेष प्रयासों से किया गया, जिनकी पहल से महिलाओं को अपने विचार रखने का सशक्त मंच प्राप्त हुआ।
वक्ताओं ने बताया कि अधिनियम महिलाओं को निर्णय लेने की शक्ति, राजनीतिक भागीदारी और समाज में बराबरी का अधिकार देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। अगर यह कानून पूर्ण रूप से लागू होता है तो “सशक्त महिला, सशक्त समाज” का निर्माण संभव है। यह अधिनियम देश की आधी आबादी को नई दिशा देने के साथ लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
श्रीमती पवन आर्य ने कहा कि अधिनियम महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देता है, अब महिलाएं सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि स्वयं निर्णय लेने वाली भूमिका में आएंगी।
श्रीमती इंदिरा खत्री ने कहा कि जिस संस्थान में महिलाएं नेतृत्व में होती हैं वहां भ्रष्टाचार लगभग शून्य रहता है और महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक ध्यान देती हैं।
एडवोकेट अनुराधा सिंह ने कहा कि समाज का आधार स्त्री है। महिलाओं को राजनीति और नेतृत्व में आने के लिए अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि मौका मिलने पर वे समाज और महिलाओं के हित में बेहतर कार्य कर सकती हैं।
एडवोकेट नम्रता रावल ने खुली चर्चा में कहा कि महिलाएं अपने अधिकारों को समझेंगी तभी वे इस अवसर का सही उपयोग कर पाएंगी। इसके लिए महिला शक्ति का जागरूक रहना आवश्यक है तथा शिक्षित महिला जनप्रतिनिधि समाज को अच्छे संस्कार दे सकती है।
डॉ अवनी देवासी ने कहा कि आज घूंघट में रहने वाली महिला भी देश चला सकती है। अब समय आ गया है कि विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाए। जहां भी महिलाओं को मौका मिला है, उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। सावित्रीबाई फुले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, लता मंगेशकर, पी.टी. उषा, किरण बेदी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
खुली चर्चा का संचालन पिंकी राजपुरोहित द्वारा किया गया। कार्यक्रम आयोजन एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर खुली चर्चा का अवसर प्रदान करने पर मातृशक्ति द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य वीरेन्द्र सिंह चौहान का धन्यवाद दिया ।
संगोश्ठी में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि
लोकसभा में अधिनियम का उद्देश्य मातृशक्ति को अधिकार, सुरक्षा और सम्मान देना था, उसे विपक्ष द्वारा पारित नहीं होने देना निंदनीय ही नहीं देश की हर बहन-बेटी के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। कुछ लोगों के लिए राजनीति, नारी गरिमा से भी ऊपर है।
जो लोग महिला सशक्तिकरण की बातें मंचों पर करते हैं, वही जब ठोस कदम उठाने का समय आता है तो बाधा बन जाते हैं—यह दोहरी मानसिकता अब देश देख चुका है।
मातृशक्ति के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन नारी सम्मान के मुद्दे पर अड़ंगा डालना, राष्ट्र की आत्मा को आहत करने जैसा है। अब समय आ गया है कि देश की महिलाएं ऐसे दोहरे चरित्र वालों को करारा जवाब दें।
कार्यक्रम में एडवोकेट लक्ष्मी, रेणु वर्मा, कल्पना राणावत, गीता माली, पार्षद अनिता राठौड़, हेमलता पुरोहित अधिवक्ता अंजली खंडेलवाल, खुशबू माली, ममता वैष्णव, नम्रता, कीर्ति पुरोहित, पंचायत समिति सदस्य रम्बा माली, रंजन कुमावत दुर्गा वाहिनी विभाग संयोजिका पिंकी राजपुरोहित, नीता रावल, भूमिका राजपुरोहित एवं प्रांजल रावल ने भी उपस्थित ने भी विचार रखते कहा कि
भारत में लाखों महिलाएं—चाहे वे गाँव की सरपंच हों, सेना में अधिकारी, डॉक्टर, शिक्षक या खिलाड़ी—अपने कार्यों से देश का नाम आगे बढ़ा रही हैं।

संपादक भावेश आर्य

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