ब्रेकिंग न्यूज़

सिरोही जिले में विपक्ष आन्दोलन की राह पर, सत्तारूढ भाजपा जनसमस्याओ के समाधान में बेअसर


-आजादी के बाद से विकास के लिये तरस रहा सिरोही जिला


सिरोही 17 जनवरी (हरीश दवे) ।

राजस्थान का सर्वाधिक पिछला व ऐतिहासिक आध्यात्मिक प्राकृतिक व धार्मिक पर्यटन की विपुल संपदा वाला सिरोही जिला जिसने देश की स्वाधिनता से लेकर संविधान निर्माण तक अपना योगदान दिया है तथा आजादी के बाद भारत की नामी गिरामी हस्तियो ने यहा से जनप्रतिनिधित्व किया है। आजादी के 76 साल बाद सिरोही जिले को पहली बार स्थानीय सांसद ही मिला है तथा प्रदेश की सरकार ने राज्यमंत्री ओटाराम देवासी भी यहा से विधायक निर्वाचित होकर जनप्रतिनिधित्व कर रहे है। लेकिन राजनीतिक उदासिनता से घीरे जिले में जहा डबल इंजन की सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है लेकिन मौजूदा समय में सिरोही जिले की तीनो विधानसभा क्षेत्रो में आन्दोलन की गूंज में आम जनता हर क्षेत्र में त्रस्त हो रही है। कही सरकारी महकमो, चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र में अधिकारीयो की कमी है तथा रेवदर आबू पिण्डवाडा शिवगंज सिरोही सर्वत्र आम जनता की समस्या को लेकर विपक्ष आन्दोलनरत है तथा जिला मुख्यालय पर लम्बे समय से आयुक्त का पद रिक्त होने की वजह से जन साधारण परेशान हो रहा है तथा जिला मुख्यालय पर अनाधिकृत बांध काम व अवैध अतिक्रमणो असुरक्षित सडको व बेसहारा पशुओ की समस्या से आमजन त्रस्त है। यह अलग बात है कि सांसद लुम्बाराम चौधरी अवश्य देश की संसद में मुद्दे उठाते है और जिला मुख्यालय पर केन्द्रिय विद्यालय की सौगात अवश्य दिलायी है लेकिन डबल इंजन की सरकार के जनप्रतिनिधियो की तमाम कोशिशो के बावजूद सत्तारूढ पार्टी के पदाधिकारियो के कारनामो पर विपक्ष व कांग्रेस आक्रामक होकर आन्दोलनरत है वही पिण्डवाडा में अवैध खनन तथा जिला मुख्यालय पर रामझरोखा मंदिर की सम्पत्ति पर बने अवैध पट्टे व नगर परिषद की कारगुजारियो का खामियाजा आने वाले समय में भाजपा को भुगतना पड सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिरोही जिले ने देश की आजादी व राजपूताने में ब्रिटिश दास्ता से मुक्ती दिलाने के लिये रियासतो के खिलाफ प्रजामंडल गठित कर बिगुल फुका व महात्मा गांधी के निर्देशो के बाद राजस्थान कांग्रेस के पहले कार्यकारी अध्यक्ष बने व देश की आजादी के लिये कार्य करते हुए 6 साल कारावास भुगता व देश के संविधान के निर्माण में भी गांधी, नेहरू, पटेल व अम्बेडकर के साथ कार्य किया और जब माउण्ट आबू व देलवाडा के गुजरात विलय को लेकर देश के पहले गृहमंत्री वल्लभ भाई पटेल आमादा हुए तो उन्होने आदिवासियो के साथ आन्दोलन कर आबू व देलवाडा को राजस्थान में विलय करवाया।
इसी जालोर सिरोही संसदीय क्षेत्र के पहले आम चुनाव में सर्वोदयी नेता व सिरोही रियासत के प्रधानमंत्री स्व. गोकुलभाई भट्ट को 1952 में निर्दलीय प्रत्याशी भवानीसिंह से भीतरघात में हारना पडा व उसके बाद उद्योगपति सुरज रतन दमानी, हरिचन्द्र माथुर, देवकीनंदन पाटोदिया, नरेन्द्र कुमार सांघी जैसी हस्तियो ने सिरोही का प्रतिनिधित्व देश की संसद में किया और उसके बाद एससी की सीट पर हुकमाराम मेघवाल, वरदाराम फुलवारिया के बाद देश के धाकड नेता व पूर्व गृहमंत्री सरदार बूटासिंह व भाजपा के नेता व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण की धर्मपत्नि सुशीला बंगारू ने यहा से जनप्रतिनिधित्व किया लेकिन सिरोही जिला पूर्णतया उपेक्षित रहा। उसके बाद अवश्य जालोर संसदीय क्षेत्र के देवजीभाई पटेल यहा से सांसद रहे तो उन्होने पिण्डवाडा रेल्वे स्टेषन के नाम बदलने के अलावा सिरोही में पासपोर्ट ऑफीस अवश्य खुलवाया तथा फोरलाईन हाइवे जिले से गुजरे व केन्द्र सरकार की योजनाओ प्रधानमंत्री सडक योजना व जलसंरक्षण की योजना के साथ अनेक कार्य हुए तथा पेयजल समस्या के समाधान में 1965 से लम्बित साबरमती, माही, सेई बांध, नर्मदा नहर परियोजना कागजो पर चलती रही लेकिन सिरेाही जिले की बनास नदी व बत्तीसा नाला का पानी फिजूल में बहकर गुजरात के बांधो को समृद्ध करता रहा। लेकिन जिले की जल समस्या का निदान नही हुआ।
सांसद व राज्यमंत्री से जनता की अपेक्षा-
जिला मुख्यालय पर कालकाजी मानसरोवर बांध जैसे प्राकृतिक स्त्रोत उजाडे जा रहे है व उसमें अतिक्रमण हो रहे है। आजादी के बाद अर्बुदा गौशाला व डेयरी फार्म की 5000 बीघा भूमि स्व. गोकुलभाई भट्ट ने अर्बुदा गौशाला डेयरी फार्म के रूप में आरक्षित रखी व विकसित की जिसे भी उजाड दिया व उस पर एमओयू हो गये। न डेयरी खुली जिससे रोजगार की संभावना पशुपालको में बढती न गोवंश को फायदा मिला। रियासतकाल में भी सिरोही में हवाई पट्टी व उस पर देश की नामी गिरामी हस्तिया उतरी। लेकिन राजनीतिक रस्साकशी में सिरोही में हवाई सेवा भी जनता की लगातार मांग के बावजूद नही खुली। जिला मुख्यालय से फोरलाईन हाइवे गुजरे न ही रेल लाईन की सुविधा जिला मुख्यालय तक पहुंची। यह अलग बात है कि दोनो ही प्रभावशाली राजनेता है लेकिन जिले की भौगोलिक व सामाजिक आर्थिक स्थिति के अनुरूप डबल इंजन की सरकार की योजनाओ का सम्पूर्ण फायदा जिले की आदिवासी व पिछडी जनता के लिये दिलाने में वो बेअसर साबित हो रहे है।
जिले की जनता व कांग्रेस आन्दोलन की राह पर-
वर्तमान में राजस्थान की भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही आबू पिण्डवडा में अवैध खनन परियोजना को लेकर विगत महिनो से जोरदार आन्दोलन चल रहा है जिसमें अब राष्ट्रीय पशुपालन संघ के लालजी देवासी ने भी शिरकत होकर 28 जनवरी को आन्दोलन का शंखनाद किया है। वही कांग्रेस पार्टी व पूर्व विधायक संयम लोढा ने मनरेगा व जिले में 2000 से ज्यादा हुई चोरियो का पर्दाफाश नही होने 50 बच्चीयो के गुमशुदा व पंचायत व निकायो में भ्रष्टाचार को लेकर आन्दोलन छेड दिया है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एसीडी के हत्थे चढ रहे है। पूरे जिले में अवैध रैती खनन व चिनाई पत्थरो की खनन के राजनीतिक संरक्षण में बाढ आ चुकी है और पुलिस कर्मी इनके खिलाफ कार्यवाही करे तो सिधा लाईन हाजिर हो जाता है। वही जिले में शराब तस्करी व मादक पदार्थो की तस्करी चरम सीमा लांघ चुकी है। जिसमें पुलिस प्रशासन यदा कदा कार्यवाही भी करता है। आने वाले समय में पंचायतीराज चुनाव व स्थानीय निकायो के चुनाव से पूर्व विपक्ष ने आन्दोलन रच अपनी भूमिका तय कर दी है वही भारतीय जनता पार्टी संगठन आपसी गुटबाजी से सत्ता व संगठन में बिखराव है जिसको समय रहते भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भण्डारी सासंद लुम्बाराम चौधरी व राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने विपक्ष के तेवरो को देख संभावित आन्दोलनो की पृष्ठभूमि पर वाजिब कार्यवाही नही की तो इसके परिणाम जिले व भाजपा संगठन के लिये अच्छे साबित नही होगे। यह अलग बात है कि राज्यमंत्री ओटाराम देवासी व सांसद क्षेत्र के विकास के लिये भरसक प्रयत्न कर रहे है और देवासी ने 1700 करोड के विकास कार्य भी स्वीकृत करवाये है व चल रहे है लेकिन विपक्ष इस पर आरोप जड व ठेकेदारी में भ्रष्टाचार के मुद्दे बनाकर जिस प्रकार भाजपा संगठन व प्रशासन को घेर रहा है तथा भाजपा संगठन पदाधिकारी तमाशबिन बनकर जनता की समस्या के समाधान के प्रति उदासीन रवैया बरत रहे है तथा जिला मुख्यालय पर नगर परिषद प्रशासन की कारगुजारी व रामझरोखा मंदिर व सनातन सम्पत्तियो को हडपने के मसले पर वाजिब कार्यवाही नही हुई तो इस आखिर तक राज्य सरकार को जिला मुख्यालय पर आन्दोलनो का सामना करना पडेगा।

संपादक भावेश आर्य

Related Articles

Back to top button