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ऐकाधिकार के चपेटमें खुर्दबुर्द हो रही रामझरोखा मंदिर की धरोहर,


-महंतसीतारामदास ने स्थानीयजनो से तोडानाता,
प्राचीनमंदिर के वैभव से हो रहा खिलवाड़,


-दिल्ली के रामलीला मैदान जैसा महत्व है सिरोही का रामझरोखा मैदान,


सिरोह (हरीश दवे)।

आक्रांताकाल में संत महंतो के भक्ति आन्दोलन के दौरान निम्बार्क सम्प्रदाय के महंत राधिकादासजी बाबा तत्कालीन सिरोही रियासत के महारावो के सम्पर्क में आये व राजगुरू की उपाधि मिलने के साथ उन्हे धार्मिकजागीरी के रूप में रामझरोखा महामंदिर द्वारिकाधीश रोहिडा, माउण्टआबू, आबूरोड, पालडी समेत अनेक स्थानो की भूमि का अर्पण किया व सिरोही में रामझरोखा में भगवान कृष्ण व राधिका तथा महामंदिर में भगवान श्रीरामजानकी- लक्ष्मण का भव्य दिव्य मंदिर उत्तराधिकारी वंशपरम्परा में दिवंगत महंतजयरामदास के जीवनकाल में भूमिलीज व किरायेदारो के कब्जो का शिकारहुई व उनके निधन के बाद वसीयत के अनुसार उनके चेला महंत सीतारामदास ने किरायेदारो व भूमि के कब्जो को छुडाते हुए व न्यायिक मुकदमो को झेलते हुए आखिरकार रामझरोखा की सम्पत्ति को सोलट्रस्टी के रूप में भूमि को लीज व बेचान किया।जिसको लेकर सिरोही नगर में रामझरोखा की सम्पत्ति व अनेक धार्मिक सम्पत्तियों व सार्वजनिक महत्वों की सम्पत्तियों को पूर्ववर्ती कांग्रेस बोर्ड के कार्यकाल से वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यवाहक आयुक्तो के चलते जो जमीन बेचान व लीज का प्रकरण सामने आने के बाद अनेक समाज के धर्मावलम्बियो में गहरा आक्रोश है। एवं इस को लेकर सामाजिक स्तर पर बैठके हो रही है तथा इस प्रकरण में महंत सीतारामदासको पूछे जाने पर उन्होने कुछ भी कहने से इंकार किया।
शहर के इतिहास व आध्यात्मिक महत्व के प्रमुख धर्मस्थान रामझरोखा मंदिर के बाहर रामझरोखा मैदान जिससे लाखों सिरोही व देश वासियों की भावना जुडी हुई है जिसमें रामझरोखा की परम्पराओं के हृास होने के आभास में जिले की धार्मिक महत्व की विलुप्त हो रही सम्पदाओं मेंआनेवाले समय में रामझरोखा भी कही महामंदिर जितना सिकुड कर लघुमंदिर न रह जाये इसको लेकर सनातन धर्मावलम्बि आशंकितहै।
देश की आजादी से पहले रामझरोखा मंदिर निम्बार्क सम्प्रदाय के महंत राधिकादासजी के आश्रम, गोसेवा के लिये स्थितप्राचीनमंदिर के साथ कृषि भूमि प्रदान की थी।आजादी के पहले व बाद में मंदिर को छोडकर भूमि विकास के साथ सिकुडती गई ।
रामझरोखा के भव्य द्वार नष्ट हुए।तथा रामझरोखा मंदिर के साथ बावडी के रियासत कालीन मूलपट्टे के अलावा अन्य भूमि महंत जयरामदास के निजी नाम पर चढी जिसे पूर्व में दो दशक विरेन्द्रमोदी भाजपाबोर्ड के कार्यकाल में कुछ लोगो ने महंत जयरामदास से लीज पर ली और बाद में गहरा धार्मिक विवाद होने पर हिन्दूजागरणमंच के मुकेश मोदी व अन्य को न्यायिक आदेश पर यह भूमि रामझरोखा कोपुनः मिली।लेकिन गत वर्षो आपसी करार में महंत ने एक स्कूल को लीज पर विकास के लिये दे दिया है।तथा शेष भूमि को अन्य भूखण्ड क्रेताओ को बेच दिया जिसके आठ भूखण्डो के पट्टे भी बन गये।अब यह स्थिति उजागर होने व हिन्दू सम्पत्ति को लोकल प्रभावशाली जनो द्वारा खरीदे जाने के बाद पशोपेश की स्थिति बन गई है पर अब इस को लेकर एडवोकेट दिनेशराजपुरोहित ने कहा कि रामझरोखा मंदिर जन-जन की भावना व आराध्य का केन्द्र है।और बरसो से सनातन धर्म की हर धार्मिक रामनवमी, जन्माष्टमी, दीपावली, गंगापूजन व रामझरोखा की चम्पावतीबावडी का धार्मिक महत्व रहा है जब कि आज वहा से कलश धारण करने पर भी मन्दिर प्रबन्धन के पुजारी से धर्मावलम्बियो कोबदसलूकी का सामना करना पड रहाहै जिसके शिकार नियमित भक्त होते है।

रामझरोखा मंदिर की तमाम सम्पत्तियाअतिक्रमणो की चपेट में है तथा दानदाताओं द्वारा बनाई गई स्कूल के कमरे व धर्मशाला लीज पर दी गई हैअथवा किराये पर कमरे दिये गये है।मंदिर में विधि विधान से न तो पुजारीहै, न रामझरोखा की परम्पराओं के अनुरूप पूजापाठ व आरती होती है तथा चारो और अवैध यातायात पार्किंग में बावडी की तरफ शराबीयो व गरदुल्लो का साम्राज्य है व शहर का कचरा चम्पावती बावडी के बाहर फैका जा रहा है तथा बावडी को मुत्रालय बना दिया।जहां गरदुल्ले गर्द उडातेहै।
समाज सेवी महावीरजैन बरसो से चम्पावती बावडी के आगे रात्रि में शराबियो व गरदुल्लो की हरकतो पर शिकायते करते रहे है व यदा कदा कोतवालीपुलिस कार्यवाही भी करतीहै लेकिनमहंतसीतारामदास द्वारा पूरी ही कौताही बरतीजारहीहै व मंदिरकी तमाम प्राचीन परम्पराये लुप्त कर महामंदिर की तरहमंदिर को निजीमंदिर की तरह उपयोग में लिया जा रहा है जिससे जनभावना आहत हो रही है।
देश की आजादी व उसके बाद के तमाम धार्मिक आयोजन, राजनीतिक सभाये, आपातकाल की सभा, जेपी के आन्दोलन, जगदम्बे नवयुवकमंडल के गरबे व हरसमाज की धार्मिक परम्पराये रामझरोखा मंदिर से जुडीहुईहै और उस रामझरोखा मंदिर जिसकी सम्पत्ति से जुडी बाल गोपाल गौशाला, हेतसागर व इस से जुडे कृषिकुए भी हैऔर इन्हीसम्पत्तियो का न तो वैधानिक रखरखावहै न हिसाबकिताबहैतथामहंतसीतारामदासअपने प्रयासो में इस सम्पत्ति को उबारने के लिये सक्षम हाथो में भूमि को लीज पर देकर स्वयं एवं मंदिर की समृद्धि को लाना चाहते है। लेकिन यह भी सत्य है कि रामझरोखा मंदिर की चारदीवार भी नगर के हर निवासी के सहयोग से बनीहै।और संत महंतो के साथ कावडयात्रा की तरह घर घर से ईटे संग्रहित की गई थीऔर उस रामझरोखा की सम्पत्ति के साथ भले ही राजनीतिकदलो ने अपने अपने व्यक्तियों को बचाने के लिये चुप्पी धारण की हो तथा विहिप भी चुप्पी धारण कर बैठा हो।
लेकिन धार्मिक प्रन्यास की भूमि के मन्दिर उपयोग से परे भूमि का निजीकरण व व्यवसायिक करण होने से सकल सनातन36 कौम सेवा समिति व हिन्दूसमाज के विभिन्न युवा संगठन रामझरोखा, लालवेरा, श्मशानभूमि व तालाबो की भूमि हडपनेवालो के पूरी पत्रावली के साथ यहा के सांसद व राज्यमंत्री को अवगत करायेगे तथा रामझरोखा मंदिर से जुडे मामलो पर राज्य सरकार सीधा निर्णय कर की जा रहीअनुचितकार्यवाही जिसमे सरकारी तंत्र व राजनीति का सरंक्षण है।परनिर्णय करे जिसको लेकर हिन्दूवेव के जिलाउपाध्यक्ष दिनेशप्रजापत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांगकी।
वही रास्ट्रीय बजरंग दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भावेश आर्य ने कहा कि समय रहते रामझरोखा की सैम्पत्ति हड़प करने वालो ने पुनः यह भूमि मन्दिर को नही सौपी व महन्त सिताराम दास ने जन भावनाओ के अनुरूप मन्दिर का विकास नही किया तो परिणाम भुगतने को तैयार रहे। नगर वासी रामझरोखा,महमन्दिर, हिन्दू श्मशान व नदी नालों व तालाबो की भूमि व व सरकारी भूमि हड़पने वाले तत्वों के खिलाफ सभी तथ्यों के साथ रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी के कार्यालय को जिला कलेक्टर शिरोही के मार्फ़त दर्ज करवाएंगे।
व रामझरोखा की भूमि से कोई खिलवाड़ नही होने देंगे।

संपादक भावेश आर्य

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