राज. महाविद्यालय, सिरोही में मनाया गया ‘राष्ट्रीय रसायन विज्ञान’ दिवस

सिरोही(हरीश दवे)।

राजकीय महाविद्यालय, सिरोही में शुक्रवार को रसायन शास्त्र विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विभाग में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र रे के जन्मदिवस 2 अगस्त को देश भर में राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। बंगाल में जन्मे आचार्य पी. सी. से आधुनिक रसायन के प्रथम भारतीय प्रोफेसर थे और उन्होंने ही मारत में रसायन उद्योग की शुरुआत की थी।
कार्यक्रम के आरम्भ में रसायन शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो. हेमलता ने आचार्य पी.सी. रे का परिचय देते हुए बताया कि उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है। न केवल रसायनशास्त्र बल्कि इतिहास विषय में भी उनकी गहरी रुचि रही है। इसके पश्चात् द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा उन्नति आबा ने आचार्य पी.सी. रे का सम्पूर्ण जीवन परिचय देते हुए बताया कि किस प्रकार बारह वर्ष की आयु में ही उन्होंने विश्व के एक हजार महान लोगों की सूची में केवल एक भारतीय राजा राम मोहनराय का नाम देखा और तभी उनके मन में इस सूची में स्वयं का नाम देखने की इच्छा जागृत हो गई। इसके बाद बी.एन.सी. तृतीय वर्ष की छात्रा भूमिका रावल ने बताया कि रसायन शास्त्र हमारे दैनिक जीवन का आवश्यक हिस्सा है और इसी रसायन शास्त्र के महान वैज्ञानिक आचार्य पी.सी. रे. का बोगदान भी बहुत महत्वपूर्ण है। नाइट्स पर उनका काम अतुलनीय है। एम.एस.सी. के छात्र अर्जुन ने आचार्य पी.सी. रे के जन्म को एक महान घटना बताते हुए यह भी बताया कि वे न केवल एक शिक्षक और रसायनज्ञ थे बल्कि एक महान रसायन उद्यमी भी थे। इन्होंने ही भारत की पहली दवा कम्पनी बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स की स्थापना की थी। छात्रा खुशी रावल ने बताया कि आभार्य पी.सी. ने की आत्मकथा ‘लाईफ एण्ड एक्सीपीरियंसेज ऑफ ए बंगाली केमिस्ट नाम से प्रकाशित हुई थी। छात्र पीयूष दवे ने बताया कि आचार्य पी.सी. रे ने पहले एन्ट्रेचा एसजाम पास करके मैट्रोपोलिटिन कॉलेज में प्रवेश लिया और उनकी रुचि रसायन विज्ञान के प्रति बढ़ने लगी, तत्पश्चात उन्होंने यूके के एडिनबरा विश्वविद्यालय में प्रदेश लिया। इसके बाद भारत लौटकर वे सहायक आधार्य के पद पर नियुक्त हुए। छात्र कुणाल जोशी ने सभी को राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस की बधाई देते हुए बताया कि आचार्य पीसी रे को गिलकाइस्ट छात्रवृत्ति प्राप्त करके एडिनबरा यूनिवर्सिटी में प्रदेश मिला था। जब उन्होंने स्थायी मरक्यूल्स नाइट्राइट का संश्लेषण किया तो उनकी गिनती महान रसानयशास्त्रियों में की जाने लगी।
इस अवसर पर सहायक आचार्य नारायण लाल मीणा ने बताया कि आचार्य पी.सी रे ने भारत की आजादी से पूर्व ही अपनी स्वदेशी दवा कम्पनी स्थापित की थी। वे भारतीय विज्ञान कांग्रेस के आया भी चुने गये थे। उन्होंने यह भी बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में पुरातत्य विज्ञान तथा स्किल बेस्ड एज्यूकेशन को शामिल करने की बात कही गई है, जबकि आचार्य पी.सी. रे ने ए हिस्ट्री ऑफ हिन्दू केमिस्ट्री नामक किताब में पहले ही पुरातत्व विज्ञान की महत्ता को समझा दिया था। प्राणीशास्त्र विभाग के प्रो. ज्ञान विकास मिश्रा ने विद्यार्थियों से कहा कि आबार्य पी.सी. ने नाइट्राइट्स के विशेषज्ञ रहे है, तो आप सब ये जानने की कोशिश करें कि ये नाइट्राइट्स कहां-कहां उपयोगी है। उन्होंने प्राचीन भारतीय विद्वानों धनवन्तरि और सुश्रुत के योगदानी के बारे में भी बताया।
छात्र विकलित चपल ने बताया कि आचार्य पीसी रे ने पूरा जीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था और जीवनपर्यना रसायन एवं देश की समर्पित रहे। विपुल पुरोहित ने कहा कि आचार्य पी.सी. रे
अपनी पढ़ाई करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से मी आत्मनिर्भर रहते थे। वे विनम्रता व सादगी के परिचायक थे। छात्रा विशाखा रावल ने आचार्य पी.सी. रे का जीवन परिचय दिया तथा बताया कि वे अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा रसायन विज्ञान विभाग को दान करते थे। वनस्पतिशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रूचि पुरोहित ने बताया कि रसायन के बिना जीव-जन्तुओं और पेड़-पौधों का कोई अस्तित्व नहीं है। ऑक्सीजन, कार्बन-वाई-ऑक्साईड और बायोनोलिक्यूल्स के बिना किसी का भी जीवन सम्भव नहीं है।
कार्यक्रन के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय शर्मा ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए बताया कि आचार्य पीसी ने ‘इण्डियन केमिकल सोसाइटी के फाउण्डर थे इसलिए इसरी सोसाइटी के बैनर तले प्रतिवर्ष पूरे भारत में आचार्य पी.सी. रे के जन्मदिन को राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि आचार्य पी.सी. रे ने बहुत सी चीजी की पहल की थी, उन्होंने विज्ञान पढ़ाने, समाजसेवा करने, उद्योग स्थापित करने जैसे क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर काम किया था। उनके लिखे हुए पेपर्स नेधर जैसे प्रसिद्ध जर्नल में प्रकाशित होते थे। उनके रिसर्च स्कॉलर्स भी महान वैज्ञानिक हुए है। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भी पढ़-लिखकर, मेहनत करके राज्य और देश के स्तर पर योगदान कने और अपने गुरुओं को गर्व करने का अवसर दें। रसायन शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. हेमलता ने सबका धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आचार्य पी.सी. रे का योगदान अतुलयनीय है। उन्होने विद्यार्थियों से ये भी कहा कि वे अपने विषय के अलावा महाविद्यालय की अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
इस अवसर पर विज्ञान संकाय के प्रो. जयश्री गुरनानी, डी. गायत्री प्रसाद, नारायण लाल मीणा, प्रदीप कुमार और सुनील कुमार मीणा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नारायण लाल मीणा ने किया।

संपादक भावेश आर्य



