जालोर-सिरोही सीट, को दोनों दल जीतने के लिए एड़ी चोटी का लगा रहे है जोर

अशोक गहलोत की मेहनत लाएगी रंग,या भाजपा संगठन दिखायेगा भगवा रंग
सिरोही(हरीश दवे।

)जालोर सिरोही सीट दोनों दलों के लिए खास बनी हुई है ,बीजेपी किसी भी तरह अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को दिल्ली जाने से रोकने के लिए कोई कमी नही रखना चाहती है तो उधर दोनों जिलो के कांग्रेस कार्यकर्ताओ व नेताओ ने भी वैभव गहलोत को जिताने के लिए कमर कस रखी है ,और खुद अशोक गहलोत भी यह चुनाव जीताने के लिए पूरी ताकत लगा रहे है ।जालोर सीट पर यह पहला चुनाव होगा जिसमें एक पूर्व मुख्यमंत्री तहसील स्तर पर जनता से सीधा संवाद कर वोट मांग रहे हो। आज चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अशोक गहलोत ने जालोर व सिरोही जिला मुख्यालय पर रोड शो कर वैभव गहलोत के लिए वोट मागे। उधर पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने भी सिरोही शहर में रोड शो कर बीजेपी के उम्मीदवार लुम्बाराम चौधरी के लिए वोट मांगे।
भीनमाल में मोदी की सभा के बाद अन्य बड़े नेताओ ने भी जनता के बीच जाकर लुम्बाराम चौधरी के लिए वोट मागे ।
जालोर सिरोही सीट अब नरेंद्र मोदी व अशोक गहलोत के लिए एक प्रतिष्ठा की सीट हो गई है और दोनों यह चाहते है कि हम जीते। कांग्रेस पार्टी में एकजुटता से इस सीट पर टक्कर कड़ी हो गई है। भाजपा में संघ लॉम्बी भी इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। अब रोड शो व सीधा सम्पर्क से जीत का गणित किस तरह प्रभावित होगा और मतदान कितने प्रतिशत होता है उससे पता चलेगा ।
माली समाज लामबंद हुआ तो जीत का समीकरण बदल जायेगा
जातिगत समीकरण भी इस सीट पर बदलते जा रहे है । अनेक समाज लामबंद हो रहे है और अपना मानस भी बदलने में लगे हुए है ,अनेक समाजों के पंच दौड़धूप कर रहे है तो अनेक नेता चुपी साध कर बैठे है । प्रदेश भाजपा के चुनाव से जुड़े पदाधिकारी भी इस सीट पर नजर बनाए हुए है और कोई कमी नही रहे उसकी मोनेटरिंग कर रहे है । माली भाजपा का पक्का वोट बैंक है लेकिन कांग्रेस ने माली को टिकिट देंकर भाजपा का समीकरण बिगाड़ दिया है । अशोक गहलोत व माली समाज के प्रमुख लोग वैभव को जिताने के लिए लगातार बैठके व जनसम्पर्क कर रहे है । जिस तरह चौधरी व देवासी समाज राजनीति में सत्ता हासिल कर रहा है उसी तर्ज पर अब माली समाज भी अब सत्ता के लिए लामबंद हो रहे है और उनको यह समझ आ रही है कि वैभव तभी जीतेगा जब समाज भी उसके साथ खड़ा होगा ।
बीजेपी के लोकल नेता यह सोच कर बैठे है कि वोट मोदी के नाम पर मिलना तय है तो फिर ज्यादा दौड़धूप करने का फायदा नही है । क्षेत्र की 8 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी का चुनाव मैनेजमेंट कितना कमजोर रहा उसका एक उदाहरण यह है कि यहां पर 8 विधानसभा क्षेत्रों में केवल भीनमाल में पीएम की मीटिंग हुई। बाकी जगह कोई बड़े नेताओं की मीटिंग नही हुई। यहां तक की सिरोही जिला मुख्यालय पर भी बड़ी चुनावी सभा नही हो पाई । बीजेपी का सिरोही व जालोर जिले में संघटन जितना मजबूत व एक्टिव दिखना चाहिए वो दिख नही पाया ।
तीनो जिलो में कांग्रेस है एकजुट
कांग्रेस में संघठन तो नही था लेकिन गहलोत से जुड़े नेताओ की टीम सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों में एक्टिव मुड़ पर दिखाई दी और खुद गहलोत व उनके नजदीकी लोग ही पूरा मैनेजमेंट संभालते हुए दिखे। साधनों के मामले यहां कांग्रेस बीजेपी से आगे दिखाई दी । गहलोत सरकार के मंत्री रहे अनेक मंत्री व समाजों से जुड़े नेता भी जातिगत समीकरणो को मजबूत बनाने के लिए भागदौड़ करते दिखाई दिए। सांसद नीरज डांगी, कांग्रेस के विधायक समरजीत सिंह,रतन देवासी,मोतीराम कोली व पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई, रमिला मेघवाल,सरोज चौधरी ,पूर्व विधायक संयम लोढा,लीलाराम गरासिया सहित प्रमुख नेतागण प्रचार प्रसार में दिल से लगे हुए दिखाई दिए। लम्बे समय के बाद पहली बार कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता व नेता एकजुटता से काम करते दिखे।
भाजपा की कमान लोकल नेताओ के हाथों में है
जालोर जिले में भाजपा में कमान नारायण सिंह देवल,पाली के महेंद्र बोहरा,पूर्व विधायक पुराराम चौधरी, सांचोर के विधायक जीवाराम चौधरी, सांसद देवजी पटेल ,मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग,विधायक शंकर सिंह पुरोहित, जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह राव तो सिरोही जिले में राज्यमंत्री ओटाराम देवासी,विधायक समाराम गरासिया ,प्रधान नितिन बंसल ,पूर्व विधायक जगसीराम कोली,महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्षा डॉ रक्षा भंडारी ,जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित , सिरोही जिलाध्यक्ष सुरेश कोठारी व जिला महामंत्री दीपाराम पुरोहित ने संभाल रखी है।इस मोर्चेबन्दी में तीनों जिलों का संगठन सुद्रढ़ चुनावी व्यूह रचना,मीडिया मेनेजमेंट नही साध सका है। बड़े नेता जब भी जिले में आये तब दोनों दलों के नेता लोग उनके साथ दिखाई दिए और दी गई जिमेवारियो के अनुरूप काम करने का अहसास कराते देखे गए । केंद्रीय गृह मंत्री इस सीट पर कड़ी नजर रखे हुए है और वे चाहते है कि यहां भाजपा अशोक गहलोत के सुपुत्र वैभव गहलोत को हराया जावे। बीजेपी के साथ साथ अब आरएसएस ने भी मोर्चा संभाल लिया है और संघ के स्वयंसेवक घर घर जनसम्पर्क कर जीत के लिए काम करेगे। आदर्श विधा मंदिर से जुड़े लोग भी इस जीत में अपनी भूमिका निभा रहे है ।
5 लाख से जीतने की उम्मीद अब हवा हवाई हो गई है
इस सीट पर कुल 23 लाख मतदाता है और उम्मीद है कि 10 से 11 लाख वोट पड़ेंगे ,अनुसूचित जाति ,जनजाति,ओबीसी,व मुस्लिम मतदाताओ की भी बड़ी तादाद है।मतदान कितने प्रतिशत होता है ओर मतदान केंद्रों के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ता कितने एक्टिव दिखते है उससे यह पता चलेगा कि ऊँट किस तरफ करवट लेता है। भाजपा की ओर से 5 लाख मतों के मार्जिन से जीतने का दावा हवा हवाई हो गया है और कड़ा मुकाबला होने से अब मार्जिन बहुत कम रहेगा।
गहलोत व चौधरी दोनों जीत को लेकर आश्वस्त है
वैसे खुद अशोक गहलोत इस सीट पर जीत को लेकर आश्वस्त है और उनका कहना है कि मेरे कार्यो व बीजेपी की ओर से सांसद देवजी पटेल ने 15 साल में कोई काम नही किया उससे जनता ने तरक्की के लिए बदलाव का मन बना लिया है उससे वैभव की जीत तय है। उधर बीजेपी के उम्मीदवार लुम्बाराम चौधरी का कहना है कि एक साधारण कार्यकर्ता को टिकिट देने से हर कार्यकर्ता अपने आप को लुम्बाराम समझकर दिल से काम कर रहा है उससे ओर देश मे इस बार 400 पार का माहौल होने व मोदी की मीटिंग व बड़े नेताओं की मीटिंगों व रोड शो से बीजेपी की जीत तय है।


संपादक भावेश आर्य



