समय, समझ एवं साधन का सही उपयोग हो: आचार्य तपोरत्नसूरी

सिरोही(हरीश दवे) ।

जैनाचार्य तपोरत्नसूरीजी ने बताया कि भगवान ने हर व्यक्ति को समय, समझ एवं साधन दिये है। अब यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वो इन तीनो का सकारात्मक उपयोग करता है या नकारत्मक। इनका सकारात्मक उपयोग करेंगा तो उसका जीवन सहज हो जायेगा और नकारात्मक उपयोग करेगा तो उसका जीवन कठिन हो जायेगा। आचार्य श्री कल पिण्डवाडा में गुरुमंदिर के जैन उपासरे में भक्तों को जीवन कैसे जीने विषय पर मार्गदर्शन कर रहे थे। आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य के शरीर मे ही मित्र्ाता व शत्र्ाुता दोनों ही हैं अब हमें यह समझना हैं कि हमें किस वक्त क्या काम कैसे करना हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्ड मे कमी निकालना तो बडा आसान हैं लेकिन खुद का जीवन कैसे अच्छा बने उस पर हम गम्भीरता से नहीं सोचते हैं। कमी निकालने की आदत को भूलकर हमें आगे बढना है।
प्रवचन में उपस्थित आतंकवादी निरोधी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. एस. बिट्टा ने आचार्य भगवंत को वंदन कर यह कहा कि आचार्यश्री मुझे देश की एकता व अखण्डता के लिए एवं मानवता की सेवा का आर्शीवाद प्रदान करे ताकि मैं मेरे बचे हुए जीवन में यह काम और मुस्तेदी से कर सकूं। बिट्टा ने कहा कि जैन धर्म का मूल मंत्र्ा हैं “ जिओ और जीने दो “ तथा अंहिसा परमोधर्म हैं। इसी मंत्र्ा के आधार पर जैन धर्म मे त्याग, तपस्या, करुणा एवं मैत्र्ाी भावना कूट-कूट कर भरी हुई हैं। किसी के साथ पक्षपात या धोखाधडी नही करना और सब के साथ मैत्र्ाीभाव रखने की बात हर व्यक्ति समझ ले और उसे अंगीकार कर ले तो देश मे अमन चेन हमेशा कायम रहेगा और भाईचारा मजबुत होगा।
बिट्टा ने नांदिया जैन मंदिर मे भगवान महावीर के उस स्थल के दर्शन किए जहाँ पर भगवान महावीर को सर्प ने डसा था। यह स्थल एक पहाड पर बना हैं। वहाँ से वे आरासना अम्बाजी मंदिर पहुंच कर मथा टेक कर देश मे अमन चेन की प्रार्थना की। आरासना वो स्थल है जहाँ अम्बामाता का मन्दिर नहीं बनाया गया है बल्कि माता खुद प्राकृतिक रुप से प्रकट हुई हैं।
बिट्टा ने बामणवाडा जैन तीर्थ मे भगवान महावीर स्वामी के प्राचीन मंदिर मे दर्शन-पूजन कर शांति की प्रार्थना की और उस स्थल को देखा जहाँ पर “भगवान महावीर को साधना के वक्त ग्वालो ने कानो मे किले ठोके थे।“
बिट्टा ने सिरोही के आराध्य देव श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर की परिक्रमा कर दर्शन किऐ और वहां उपस्थित पण्डितो ने मंत्र्ाोचारण के साथ पूजा करवाई। पुजारी अशोक रावल ने बिट्टा का स्वागत करते हुए इस प्राचीन तीर्थ के इतिहास से उन्हे अवगत कराया।
बिट्टा ने केसर विलास मे सिरोही के पूर्व महाराजा पदमश्री रघुवीर सिंह देवडा व युवराज इन्द्रेश्वर सिंह देवडा से मुलाकात कर “सिरोही राज्य“ के इतिहास के बारे मे जानकारी हासिल की। युवराज ने बिट्टा को गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया और केसर विलास व सिरोही राजमहल के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने जैन वीसी मे आचार्य धुरन्धरसूरीजी एवं अन्य आचार्य भगवंतो से मिलकर आर्शीवाद लिया। बिट्टा ने 9वीं शताब्दी के प्राचीन जैन तीर्थ “हमीरपुरा पार्श्वनाथ“ भगवान के दर्शन किए और प्राचीन तीर्थ मे दियाणा मे उपधान करवा रहे साधु-साध्वी भगवंतो एवं आराधको से मिलकर उनके तप की सुखशांता पुछी। उन्होने नितोडा मे “बाबाजी महाराज“ के दर्शन कर भारत के तेजी से आगे बढने की कामना की।
उन्होंने पावापुरी तीर्थ मे भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए और जीरावला तीर्थ मंे आरती का लाभ लिया। और पार्श्वनाथा दादा से देश में शांति की कामना की। दो दिवसीय मारवाड दौरे के बाद वे पुनः दिल्ली लौट गये। उनके साथा पावापुरी ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन व जोधपुर के उनके मित्र् दिनेश जैन थे।



संपादक भावेश आर्य



