दुख,संकट,चिंता,अवसाद मानव जीवन रूपी सीढ़ी आखिरी नही ईश्वर में विश्वास ही परम सत्य-फादर जिमी

सिरोही(हरीश दवे) ।

स्थानीय सेंट जोसेफ कैथोलिक गिरजाघर के गुड फ्राइडे पर आयोजित प्रार्थना व आराधना कार्यक्रम में गिरजा घर के पल्ली पुरोहित फादर जोमी फादर सीवी अब्राहम फादर जिमी के आयोजित हुई सिरोही सेंट जोसेफ कैथोलिक गिरजाघर के प्रवक्ता रणजी स्मिथ ने बताया कि गुड फ्राइडे पर पुण्य शुक्रवार को पूजन विधि समारोह के दिन भागों में आयोजित हुई इसमें पहला भाग शब्द समारोह दूसरा भाग क्रॉस की उपासना तीसरा भाग परम प्रसाद विधि के माध्यम से आयोजित हुई जिसमें सेंट जोसेफ कैथोलिक गिरिजा के परिसर में 14 स्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा घुटने टेकर प्रार्थना वह आराधना आरंभ हुआ क्रॉस की उपासना का समापन गिरजा करके मुख्य द्वार पर संपन्न हुआ 10 मिनट के विश्राम के पश्चात पूजन विधि समारोह में शब्द समारोह का आयोजित हुआ जिसमें युवाओं द्वारा पवित्र बाइबल के ग्रंथ को पढ़ा गया उसके पश्चात फादर जिमी ने पवित्र स समाचार के द्वारा श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु यीशु ने अपना रक्त बहाकर पास का संस्करण स्थापित किया है प्रभु यीशु ने दुख भोग द्वारा मृत्यु का विनाश कर हमारा उद्धार किया है दुख भोग हमें सिखाता है की दुख संकट मानव जीवन की जीवन रूपी सीढी की आखिरी सीढी नहीं है बल्कि हर दुख संकट आनंद से प्रभु ललित होने वाला बीज मंत्र है सहनशीलता के साथ उठाया गया दुख संकट हमें मिलने वाला अपार पुरस्कार की प्रतिष्ठा एवं प्रतिष्ठ प्रत्यक्ष करने उनके केंद्र करने तथा उन्हें संकट सहने के लिए प्रेरक होता है उन्हीं के द्वारा हमारे अभयानंतर में स्वर्गीय सौभाग्य का प्रारंभ होता है और सच्ची शांति और भाईचारा कायम रहता है हमें अपना अल्प कलशो को अधिक सरता से सहने के निर्मित दूसरों के कठिन कलशो को सहन करना चाहिए यदि हम प्रभु यीशु के दुख पिड पर ध्यान देंगे तो हमें कभी अपना दुख सहने में कठिनाई नहीं होगी उन्होंने अपना संबोधन में कहा कि मानसिक पीड़ा शारीरिक गांव या चोट जल्दी ठीक होने की उम्मीद कर सकते हैं लेकिन मन में लगी चोट जल्दी ठीक होने का नाम नहीं लेती है वह हमें बार-बार याद दिलाती रहती है आज मनुष्य भौतिकवाद जीवन व्यवस्था की ओर अग्रसर हो रहा है वही मनुष्य अपने प्रिय जनों को भी भूल जाते हैं उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने बुजुर्ग माता-पिता को पहचानने से इनकार करते हैं क्या उन्हें प्यार और सम्मान देते हैं अथवा उनको अपने जीवन को अकल अकेले बिताने को निवेश करते हैं यह हमारे लिए अंदर आत्मा से विचार करने का विषय है इन सब का मुख्य एक कारण है ईश्वर के प्रति हमारी आस्था का काम होना पारिवारिक संस्कार एक के प्रति दूसरा का सम्मान एवं भाईचारा की कमी जब मनुष्य को कठिन परिस्थिति उत्पन्न होती है तब मनुष्य ईश्वर की ओर दौड़ लगाता है मनुष्य को दुख और सुख में भी ईश्वर की आराधना करना चाहिए तभी मनुष्य को अच्छे कम से अच्छे फल प्राप्त हो सकते हैं आराधना व प्रार्थना के समय गिरजाघर के पल्ली पुरोहित फादर jomy मैं विश्वस्यों के लिए महा प्रार्थना की जिसमें संसार में शांति तथा एकता एवं एवं मनुष्य में सुख शांति में जीवन प्रार्थना की साथी सभी धर्म अध्यक्षों राजनीतिक नेताओं अधिकारी एवं कर्मचारी गण के लिए भी निष्पक्ष रूप से मनुष्य के प्रति आधार एवं दया के भाव से कार्य करने के लिए प्रार्थना आयोजित की उन्होंने कहा है कि सभी मनुष्य सच्चा हृदय से भला आचरण करके ईश्वर को जान सके ईश्वर की आस्था रखते हुए पुण्य कार्य करें अंत में सभी श्रद्धालुओं ने 40 दिन तक उपवास रखने के पश्चात आज श्रद्धालुओं ने एक साथ उपवास खोल पास का संस्कार बनाया



संपादक भावेश आर्य



