भक्तो को जो राह बता दे वही राधे-पूज्य भाई संतोष सागर महाराज, भागवत कथा के छठवे दिन कथा की भाव पूर्ण प्रस्तुति पर झूमे भक्त गण,

सिरोही(हरीश दवे)।

श्री मदभागवत कथा के छठवें दिवस भागवत
कथा की पूर्व संध्या पर नानी बाई रो मायरो के तृतीय दिवस की कथा में भक्त नरसी मेहता के नारायण प्रेम एवं अटूट विश्वास का वर्णन किया गया।
भगवान नारायण स्वयं एक हाथी के वेश में संत नरसी मेहता को मिले एवं उनकी टूटी-फूटी बैलगाड़ी को ठीक कर हीरे जवाहरात से रतन से जड़ित कर गांव अंजार मायरा भरने पहुंचे ।
मेरे की कथा में नानी बाई को अपनी पिता से मिलने के बाद अपनी मां का स्मरण आया । इस दृश्य को संत भाई संतोष सागर ने कथा वाणी एवं भजन द्वारा धरातल पर उतारा और पंडाल में भाव विभोर भक्तों के अश्रु धारा वह निकली ।
प्रातः काल नरेंद्र पाल सिंह, महेंद्र पाल सिंह, मगनलाल माली, राजेंद्र सिंह राठौड़, सुनील गुप्ता आदि भक्तों द्वारा परिवार सहित सर्व कल्याण हेतु विष्णु सहस्त्रनाम लक्ष्मी एवं गणेश यज्ञ कर विश्व शांति हेतु आहुतियां दी ।
दोपहर कथा में रास लीला की व्याख्या करते हुए संत भाई संतोष सागर जी ने बताया की रास का अर्थ है । मन से प्रभु का मिलन, आत्मा से परमात्मा की मिलन । “रसानाम समुहम रासम” जो भक्त अपने अंतःकरण से अपने हरी को चाहे, उसे पाने के लिए लालायित रहे उसी की गोपी कहते है । भगवान कृष्ण ने बांसुरी कर्म बंधनों में जो बंधी है वह आत्मा एवं जो कर्म बंधनों से मुक्त है वही परमात्मा है ।
भटके को जो राह दिखादे वही राधे रा…. धे राधे एवं कृष्ण का विहार से राधे एवं गोपियों को उसका अहंकार राधे के मन में आया । भाई संतोष सागर जी ने बताया की “प्रेम गली अति सांकरी या तो मैं या हरी आप” मैं रूपी अहंकार जिस मन में आ जाता है उस हृदय में परमात्मा निवास नहीं करता । 19 प्रकार की गोपियों का वृतांत बताए एवं गोपीगीत सुनाया, गोपियों के अहंकार का नाश हुआ एवं करोड़ों गोपियों के साथ करोड़ों कृष्ण भक्ति रसपान किया एवं महारास के दर्शन हुए ।
11 वर्ष की आयु में कृष्ण ने वृंदावन छोड़ दिया एवं मथुरा कि यात्रा की कंस पिछले 11वर्ष से भय में जी रहा है । कंस ने रंगशाला का आयोजन कर कृष्ण एवं अक्रूर जी से बुलावा दिया । कृष्ण और गौ प्रेम एवं गोभक्ति की व्याख्या करते हुए बताया जिस घर में गाय की सेवा होती है वहां 33 कोटी देवता निवास करते हैं । कृष्ण ने अक्रूर जी को यमुना में डुबकी लगाने के बहानें अपना विशाल नारायण स्वरूप के दर्शन दिए ।
भाई संतोष सागर जी में कृष्ण की विभिन्न लीलाओं के साथ कंस वध का भी वृतांत सुनाया तथा कृष्ण बलदेव द्वारा राजा ऊग्रसेन एवं देवकी एवं वासुदेव को जेल से मुक्त कर राजा उग्रसेन को पुनः राजा बनाने की कथा बताई ।
कथा में संत तीरथ गिरी जी महाराज संत पागल बाबा संत रामाज्ञा दास जी महाराज का भी सानंद सानिध्य रहा तीरथ गिरी जी महाराज ने वर्तमान समय में भागवत रसपान एवं उसके माध्यम से राष्ट्र निर्माण का आह्वान किया संत पागल बाबा ने भी भक्तों को भाव से जुड़ने एवं क्रोध और व्यसन को त्याग कर एवं घर में शांति बनाए रखने का आह्वान किया ।
कथा में कथा में मदन सिंह परमार, नरेंद्र सिंह डाबी, राज वाघेला, गणपत सिंह देवड़ा, ओंकार सिंह उदावत, आचार्य पंडित आशुतोष, भगवती लाल ओझा, राजेंद्र सिंह राठौड़, करण सिंह डाबी, रामचंद्र प्रजापत बाबूलाल प्रजापत विक्रम सिंह यादव हमीर सिंह राव राधेश्याम मिश्रा घनश्याम मिश्र जगदीश सिंह गुर्जर सहित सैकड़ो भक्ति गानों का सानिध्य एवं सहयोग रहा ।

संपादक भावेश आर्य



